स्वास्थ मंत्री जी , आपके प्रभारी जिला SNMMCH का हाल, ना दवा, ना औजार, कैसे होगा मरीजों का इलाज

    स्वास्थ मंत्री जी , आपके प्रभारी जिला SNMMCH का हाल, ना दवा, ना औजार, कैसे होगा मरीजों का इलाज

    धनबाद(DHANBAD) - धनबाद के सबसे बड़े अस्पताल एसएनएमएमसीएच में दवाओं की कमी है, दूसरी ओर कोरोना  काल में कोरोना  जांच के लिए ट्यूब और टिप्स भी खत्म हो गए है. ऐसे में संक्रमित मरीजों की जांच कैसे होगी ,यह है बहुत बड़ा सवाल है. कोरोना काल में प्राथमिकता के आधार पर जांच और इलाज का आदेश- निर्देश है, फिर भी व्यवस्था में लगी जंग धनबाद के लोगों को परेशान कर रही है. 

    दवा रहते हुए भी नहीं दी जाती मरीजों को 

     जानकारी के अनुसार एसएनएमएमसीएच में कुछ दवाओं की कमी जरूर है लेकिन स्टोर में कई दवाएं रहने के बावजूद मरीजों को नहीं दी जाती है. उदाहरण के तौर पर गिना जा सकता है कि अस्पताल के गायनी वार्ड में भर्ती प्रसूता या मरीज के परिजनों से बाजार से दवाएं बेधड़क खरीदवाई जा रही है. आश्चर्य तो यह है कि प्रसूता के लेबर रूम में  प्रवेश करते ही परिजनों को दवाओं की लंबी सूची थमा दी जाती है, यह चेक भी नहीं किया जाता कि जिन दवाओं की सूची दी जा रही है, वे दवाएं स्टोर में है अथवा नहीं.  

    ग्लब्स  भी मरीजों के परिजनों को ही लाना होता है 

    यहां तक की प्रसव के लिए उपयोग में आने वाले ग्लब्स भी बाहर से ही मंगाए  जाते हैं ,हालांकि अधीक्षक इस बात से इनकार करते हैं और कहते हैं कि जो दवाएं उपलब्ध होती हैं ,उन्हें मरीजों को दे दी जाती है.  बता दें कि 'बिकरील'  एक नंबर या दो नंबर भी परिजनों को खरीदना होता है.  यह एक धागा होता है, जिसका उपयोग स्टीच में किया जाता है.  जानकार बताते हैं कि पिछले कई महीनों से इसकी आपूर्ति नहीं हो रही है.  

    कोरोना  टेस्ट के लिए ट्यूब और टिप्स भी खत्म

    इधर  कोरोना  टेस्ट के लिए ट्यूब और टिप्स भी खत्म हो गए है.  ऐसे में कोयलांचल के सबसे बड़े अस्पताल में कोरोना की जांच कैसे होगी, यह एक यक्ष प्रश्न है.  सूत्रों के अनुसार ट्यूब और टिप्स के लिए नेशनल हेल्थ कमीशन को पहले ही लिखा गया था, स्मार पत्र भी दिए गए लेकिन राशि आवंटित नहीं हुई. सूत्र यह भी बताते हैं कि आरटी पीसीआर जांच के लिए ट्यूब और टिप्स की सप्लाई पीसीआर मशीन बनाने वाली कंपनी करती है. लेकिन 15 लाख से अधिक का बकाया होने के कारण उसने उधार देने से इनकार कर दिया है.  यह तो है सरकारी व्यवस्था ,विकास और सुव्यवस्था का डंका पीटने वाले जनप्रतिनिधियों को अस्पताल में खुद का इलाज कराने जरूर जाना चाहिए, अगर वह इलाज नहीं भी कराना चाहे तो आम नागरिक बनकर उन्हें यह देखना  चाहिए की गड़बड़ी कहां से है और इसका समाधान कैसे होगा. बता दे कि एसएनएमएमसीएच में सीटों की संख्या बढ़ाने और मान्यता पर विवाद लम्बे समय से चल रहा है. अब तो लोग स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से यहीं कह रहें है ,मंत्री जी जिस जिले के आप प्रभारी है ,आइये अपने सबसे बड़े और सूबे के तीसरे बड़े अस्पताल SNMMCH का हाल देख लीजिए . अव्यवस्था देखकर आपको भी दुःख पहुंचेगा.

    रिपोर्ट :अभिषेक कुमार सिंह ,ब्यूरो हेड ,धनबाद


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