70 साल से सड़क के लिए तरस रहे कई गांवों के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, बोले - रोड नहीं, तो वोट नहीं

    70 साल से सड़क के लिए तरस रहे कई गांवों के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, बोले - रोड नहीं, तो वोट नहीं

    लातेहार(LATEHAR): जिले के महुआडांड़ प्रखंड के ओरसापाठ पंचायत में ग्रामीणों के द्वारा एक बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में पंचायत के विभिन्न गांवों से लगभग 400 ग्रामीण शामिल हुए. बैठक में रोड संघर्ष समिति ओरसापाठ का गठन किया गया. आक्रोशित ग्रामीणों ने केंद्र और राज्य सरकार मुर्दाबाद के साथ विधायक और सांसद मुर्दाबाद और रोड नहीं तो वोट नहीं जैसे नारा भी लगाया. इस बैठक में सर्वसम्मति से समिति का अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार यादव को चुना गया. सत्येंद्र कुमार यादव ने कहा कि इस समिति के बैनर तले हम हामी मोड़ से ओरसापाठ की जो जर्जर सड़क है उसे बनाने के लिए संघर्ष करेगे. इसे लेकर अब ग्रामीणों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है, अब निर्णय लिया गया है कि सोमवार एक फरवरी को महुआडांड़ मुख्यालय स्थित बिरसा चौक के पास हम चक्का जाम करेंगे. वहीं इसे लेकर हमारे द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन भी दिया जाएगा. ओरसापाठ पंचायत प्रखंड मुख्यालय से महज 17 किलोमीटर दूर है. ओरसापाठ पंचायत छत्तीसगढ़-झारखंड सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है, छत्तीसगढ बॉर्डर से सटे होने के बावजूद भी ओरसापाठ पंचायत तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. वन विभाग की भूमि से लोग आते-जाते हैं. वन विभाग की जिस मार्ग को ग्रामीण आवागमन के लिए इस्तेमाल करते हैं, उस पथ का कुछ भाग भेड़िया अभयारण्य क्षेत्र अंतर्गत है, मेढ़ारी पीएफ से ओरसापाठ तक जो सात किलोमीटर का रास्ता है, वह पत्थरीला, घाटी, जर्जर और कच्ची सड़क है. यही सड़क ओरसापाठ होते छत्तीसगढ़ के जिला बलरामपुर अंतर्गत सामरीपाठ तक जाती है. ग्रामीण कहते हैं कि ये सड़क बनने से झारखंड (महुआडांड़) से छत्तीसगढ़ की दूरी महज 22 किमी होगी.

    ग्रामीणों को पैदल चलकर जाना पड़ता है मुख्यालय

    ओरसापाठ पंचायत के जामडीह, कुकुदपाठ, चीरो, ओरसा, सुरकई और कबरापाठ गांव हैं, जो अधिकांश पठार है, 2011 जनगणना अनुसार ओरसापाठ पंचायत की जन संख्या 6,611 और कुल 4,400 वोटर है. पंचायत के अंदरूनी सड़कों की स्थिति ऐसी कि इन गांवों के ग्रामीण पैदल मुख्यालय तक पहुंचते हैं, वहीं कूकुदपाठ, जामडीह एवं कबरापाठ तक वाहन से पहुंचने के लिए पहले छत्तीसगढ जाना पड़ता है, फिर झारखंड के इन गांव तक पहुंचते है, शिव यादव, जगेश्वर नगेसिया, हनू अहीर, जुगना किसान, मंगरू नगेसिया आदि ग्रामीण कहते हैं कि आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी पंचायत तक पहुंच पथ नहीं होना दुर्भाग्य है. सड़क के निर्माण को लेकर अनेकों बार उपायुक्त, सांसद और विधायक तक को आवेदन देते आए हैं.

    रिपोर्ट: मनोज दत्त, लातेहार  


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