ताकि डायन बता कर फिर नहीं जारी हो कोई खौफनाक सजा...


गुमला (GUMLA) : गुमला जैसे आदिवासी क्षेत्रों में अक्सर डायन बिसाही जैसे मामले सामने आते रहते हैं. यह जिला पर एक बदनुमा दाग सा है. सच पूछिए तो पूरे राज्य की महिलाओं के लिए डायन प्रथा अभिशाप बना हुई है. इस सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए राज्य में डायन प्रथा अधिनियम भी बनाया गया है. इसके साथ ही सरकार सामाजिक स्तर पर भी इस प्रथा को हटाने के लिए काम कर रही है, लेकिन इसके बावजूद भी कोई न कोई घटना आए दिन सामने आते रहती है. संपत्ति के लोभ में लोग महिलाओं पर डायन का आरोप लगाकर उनकी हत्या कर देते हैं. गुमला में फिर कोई महिला डायन घोषित कर प्रताड़ित नहीं की जाए, और गुमला पर लगा बदनुमा दाग धुल जाए, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर एक प्रयास किया गया है.
जागरूकता रथ चलाया गया
गुमला में ग्रामीणों को सजग करने के लिए जिला प्रशासन ने एक बार फिर एक पहल की है. इसके लिए जिला प्रशासन ने जागरूकता अभियान चलाया है. जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से जिला के विभिन्न ब्लॉकों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से जागरूकता रथ निकाल गया है. इसके माध्यम से लोगों को डायन प्रथा के खिलाफ जागरूक किया जाएगा. जिला के डीसी शिशिर कुमार सिन्हा ने कहा कि जिला के लिए डायन बिसाही काफी बड़ी समस्या बनी हुई है. उन्होनें कहा कि डायन बिसाही नाम की कोई चीज नहीं है. इसको लेकर लोगों में केवल भ्रम है. लोग जब शिक्षित होंगें तभी इस कुरीति को आसानी से खत्म किया जा सकता है. वहीं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सीता पुष्पा ने कहा कि उनका उद्देश्य ग्रामीणों के साथ साथ स्कूल और कॉलेज के बच्चों को भी जागरूक कर इस समस्या को जड़ से खत्म करना है, तभी समाज को इससे मुक्ति मिलेगी. उन्होनें कहा कि गांव में आज भी कई बार लोगों को अंधविश्वास में डायन बिसाही के चक्कर में मौत के घाट उतार दिया जाता है.
रिपोर्ट: सुशील कुमार सिन्हा, गुमला
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