सीएम और हाकिमों के इंतजार में दुमका का सीएम सचिवालय बदहाल

    सीएम और हाकिमों के इंतजार में दुमका का सीएम सचिवालय  बदहाल

    दुमका (DUMKA) : काफी जद्दोजहद के बाद 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बना. राज्य बनने के बाद दुमका को उप राजधानी का दर्जा दिया गया.  उप राजधानी घोषित किए जाने के बाद वर्ष 2006 में दुमका में सीएम सचिवालय कैंप कार्यालय स्थापित किया गया. नगरपालिका चौक के समीप तत्कालीन सीएम अर्जुन मुंडा द्वारा पुराने भवन को सीएम सचिवालय कैंप कार्यालय के रूप में उद्घाटन किया गया. पर यह ऑफिस सीएम और हाकिमों के इंतजार में बदहाल है.

    मौजूदा कार्यकाल में  नहीं पहुंचे हेमंत सोरेन

    दुमका में सीएम सचिवालय बनाने का उद्देश्य था कि संताल परगना प्रमंडल के लोग सीएम तक अपनी बातों को आसानी से रख सकें. इसके लिए लोगों को रांची की दौड़ नहीं लगानी पड़े. सीएम सचिवालय कैंप कार्यालय में सीएम से लेकर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, आप्त सचिव जैसे अधिकारियों के बैठने के लिए अलग-अलग चेंबर बनाया गया. वर्ष 2006 से अब तक बतौर सीएम उद्घाटन के वक्त अर्जुन मुंडा, 14 महीने के कार्यकाल में सीएम हेमंत सोरेन और उसके बाद सीएम रहते दो बार रघुवर दास इस कार्यालय तक पहुंचे जरूर लेकिन उस वक्त भी उन सभी का जनता से मिलने या उनकी फरियाद सुनना उद्देश्य नहीं रहा. एक बार फिर सीएम बने हेमंत सोरेन को दो वर्ष पूर्ण हो रहा है लेकिन अपने मौजूदा कार्यकाल में हेमंत सोरेन कभी यहां तक नहीं पहुंचे.

    लाखों के सामान हो रहे बर्बाद

    कार्यालय में रखे लाखों रुपए के फर्नीचर कबाड़ में तब्दील हो गया. कंप्यूटर धूल फांक रहा है. कार्यालय भवन जर्जर है. भवन की भीतरी दीवारों पर पेड़ की जड़े देखकर आप भी कहेंगे कि कुदरत ने क्या खूब कलाकारी की है. सीएम सचिवालय कैंप कार्यालय के प्रति सरकार के साथ-साथ जिला प्रशासन का रवैया भी उदासीन रहा है. महज एक आदेशपाल के भरोसे यह कार्यालय चल रहा है. हाल के दिनों में सीएम सचिवालय कैंप कार्यालय की दुर्दशा समाचार पत्रों की सुर्खियां बनने के बाद भवन के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया है, लेकिन सवाल उठता है कि भवन मरम्मती के बाद यह कार्यालय विधिवत रूप से चलेगा या नहीं? सीएम से लेकर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और आप्त सचिव यहां बैठकर जनता की समस्याओं से रूबरू होंगे या नहीं? अगर यहां से जनता की समस्या का समाधान होता है तो ठीक है अन्यथा लाखों करोड़ों रुपए खर्च करने से क्या फायदा?

    रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका


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