आओ ज़रा ठहर जाएं, ज़रा रूक कर इन पेड़ों को देख लें जिनसे हमारा जीवन है... आओ जुबली पार्क चलें

    आओ ज़रा ठहर जाएं, ज़रा रूक कर इन पेड़ों को देख लें जिनसे हमारा जीवन है... आओ जुबली पार्क चलें

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) : जमशेदपुर की हृदय स्थली कहा जाने वाले जुबली पार्क सिर्फ खुबसूरती ही नहीं समेटे है, बल्कि यहां की हरियाली और पेड़-पौधे जीवनदायिनी भी हैं. सलीके से लगाए गए पेड़ एक अलग ही छटा बिखेरते हैं. टाटा स्टील ने प्लांट के पचास साल पूरे होने पर शहरवासियों को जुबली पार्क बतौर तोहफे के तौर पर दिया था. मैसूर के वृन्दावन गार्डेन की तर्ज़ पर इसे बनाया गया है जिसकी देख-रेख टाटा स्टील की सब्सिडियरी कंपनी जुस्को करती है.

    देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लगाया था पार्क में पेड़

    1958 में तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहर ने स्वयं इस जुबली पार्क का उद्घाटन किया था. उस समय दस साल से भी ज्यादा उम्र के पेड़ लगाए गए थे जो आज भी प्राण वायु का काम कर रहे हैं. इनमें से कई पेड़ साऊथ अमेरिका से भी लाए गए थे, जो जमशेदपुर के मौसम में अभ्यस्त हो गए हैं, अब इन पेड़ों में फूल भी खिलते हैं और इससे लोगों को छांव भी मिलती है. इसमें कई ऐसे पेड़ भी हैं जो पचास या सत्तर-अस्सी साल से भी ज्यादा पुराने हो गए हैं लेकिन अभी भी एकदम तरोताज़ा दिखते हैं. 

    पार्क में सबसे आकर्षक लगता है, कैंडल ट्री

    जुबली पार्क के भीतर माहुगनी, गोल्डेन कैशिया समेत सौ से भी ज्यादा किस्म के पेड़ हैं लेकिन सबसे ज्यादा आकर्षक कैंडल ट्री है, जिसमें कैंडलनुमा फूल लटके रहते हैं. ये भी साऊथ अमेरिका से लाए गए थे. उसके अलावा यहां ऐतिहासिक बरगद का भी पेड़ है जिसे जुबली पार्क का उद्घाटन करने पहुंचे तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू ने लगाया था. टाटा स्टील स्कूली बच्चों और नागरिकों को समय-समय पर ट्री वॉक करवाती है ताकि लोग पेडों के संरक्षण को लेकर जागरूक हो सकें. इसके तहत पूरे जुबली पार्क की सैर एक अलग नज़रिए से कराई जाती है, जहां विभिन्न किस्मों की पेड़ों की खासियत को दर्शाया जाता है.

    रिपोर्ट :अन्नी अमृता, जमशेदपुर


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