टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड प्रदेश कांग्रेस में अंदर खाने बवाल मचा है. इस बवाल की वजह कई है. इस बीच अब एक चिट्ठी का जिक्र चर्चा में है. जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस कोटे के मंत्री का पत्ता कट सकता है. यानि उनकी कुर्सी छिन सकती है. हलाकी पूरे मामले में आला कमान अंतिम निर्णय प्रदेश स्तर के नेता से मिले फीडबैक के बाद ले सकता है.
अगर सूत्रों की माने तो झारखंड कांग्रेस में उठे बवंडर से कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की कुर्सी पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है. कांग्रेस आलाकमान ने कई बार झारखंड में कांग्रेस विवाद को ख़त्म कराने के लिए कांग्रेस नेताओं मंत्रियों और विधायकों को पुचकारा, लेकिन अब जैसी की सूचना है, सख्त एक्शन लिया जा सकता है. सख्त एक्शन ऐसा कि कांग्रेस झारखंड सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है और मंत्रियों को हटा सकती है. ऐसा हुआ तो कांग्रेस कोटे के चार मंत्री भी सिर्फ विधायक रह जाएंगे.
चिट्ठी सार्वजनिक होने के मामले पर केंद्रीय नेतृत्व गंभीर
वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर की चिट्ठी सार्वजनिक होने के मामले को केंद्रीय नेतृत्व ने बहुत गंभीरता से लिया है. वित्त मंत्री ने चिट्ठी क्यों लिखी ,प्रदेश संगठन को क्यों निशाने पर लिया और अगर चिट्ठी लिखी भी तो उसे सार्वजनिक क्यों किया, इसको लेकर भी वित्त मंत्री के एक्शन पर सवाल किये जा रहे हैं. इस बीच यह भी पता चला है कि उनके पुत्र प्रशांत किशोर को प्रदेश कमेटी में सचिव बनाया गया था. लेकिन प्रशांत किशोर ने झारखंड प्रभारी को पत्र लिखते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. वर्तमान उठे विवाद को कई एंगल से जोड़कर देखा जा रहा है.
प्रदेश अध्यक्ष क्यों आ गए हैं निशाने पर
वित्त मंत्री ने पत्र लिखकर प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधा है. उन्होंने यह पत्र झारखंड प्रभारी के राजू को लिखा है और इस सोशल मीडिया पर भी जारी कर दिया है. हालांकि वित्त मंत्री के पत्र के संबंध में झारखंड प्रभारी ने कहा है कि वित्त मंत्री का पत्र मिला है, उसका जवाब भेजा गया है. प्रदेश समिति में एक-एक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की गई है. 14 उपाध्यक्षों को एक-एक संसदीय क्षेत्र, महासचिव को एक-एक जिला और नगर निकाय क्षेत्र की जवाबदेही दी गई है. सचिवों पर एक-एक विधानसभा की जवाबदेही होगी। उनकी मॉनिटरिंग भी की जाएगी. वैसे भी प्रदेश अध्यक्ष का फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करता है. वित्त मंत्री ने अपने पत्र में जो भी कहा है ,उसे नीचे दिया जा रहा है.
क्या कहा है वित्त मंत्री ने अपने पत्र में
श्री के. राजू,
प्रभारी, झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस
महाशय,
झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के एक आँख में सुरमा और दूसरे में काजल चरितार्थ हो गया है. कार्यकर्ता जानना चाहते हैं कि बड़कागांव क्षेत्र के कांग्रेसी स्तंभ पूर्व मंत्री श्री योगेन्द्र साव का क्या दोष था ,जिन्हें तीन वर्षों के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया गया. दूसरी ओर श्रीमती रमा खलको जिन्होंने आपको और कांग्रेस को सार्वजनिक रूप से कोसा उसे पार्टी ने चुनाव प्रबंध समिति का सदस्य बना दिया गया.
सर, 81 सीट वाले झारखण्ड विधानसभा के लिए झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के कुल 314 सदस्यों की समिति कितना कारगर होगी, ये समय बताएगा। देश में हुए चुनाव परिणाम से भी झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी को सीखने की आवश्यकता है. जंबो-जेट समिति की जगह यदि प्रदेश नेतृत्व के बारे में पार्टी कोई फैसला ले तो ही कांग्रेस संगठन के मजबूती की कल्पना की जा सकती है.

