पलामू (PALAMU): परिवार में दुख की घड़ी कभी-कभी ऐसे मोड़ ले लेती है, जहां भावनाओं के साथ मतभेद भी खुलकर सामने आ जाते हैं. ऐसा ही एक मामला जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के सलतुआ गांव से सामने आया, जहां एक महिला के निधन के बाद उसके अंतिम संस्कार को लेकर बेटों के बीच विवाद खड़ा हो गया.
मृतका के कुल छह बेटे हैं. इनमें से चार बेटे अपने पारंपरिक धर्म का पालन करते हैं, जबकि दो बेटों ने कुछ समय पहले दूसरा धर्म अपना लिया था. मां के निधन के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर मतभेद गहरा गया. चार बेटे अपने रीति-रिवाजों के अनुसार संस्कार करना चाहते थे, वहीं दो बेटे अपने नए धर्म के अनुसार अंतिम क्रिया करने पर अड़े थे. इसी बात को लेकर परिवार में तनाव बढ़ गया और विवाद की स्थिति बन गई.
मामले की जानकारी मिलते ही यह खबर पूरे गांव में फैल गई. स्थिति को बिगड़ते देख गांव के जनप्रतिनिधि, मुखिया और अन्य बुद्धिजीवी मौके पर पहुंचे. सभी पक्षों को साथ बैठाकर समझाने की कोशिश की गई. लंबे विचार-विमर्श और पंचायत के बाद अंततः यह निर्णय लिया गया कि अंतिम संस्कार चार भाइयों की परंपरा के अनुसार ही किया जाएगा, जिस पर सभी ने सहमति जताई.
गांव के मुखिया के पति हरिद्वार सिंह ने बताया कि दो भाइयों के धर्म परिवर्तन के कारण यह स्थिति बनी थी, लेकिन पंचायत के हस्तक्षेप से विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया. वहीं चैनपुर थाना प्रभारी श्रीराम शर्मा ने भी पुष्टि की कि मामला संज्ञान में आया था, लेकिन ग्रामीणों ने आपसी समझ से ही इसे निपटा लिया. यह घटना न सिर्फ पारिवारिक रिश्तों में आ रहे बदलाव को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि संवाद और सामंजस्य से बड़े से बड़ा विवाद भी सुलझाया जा सकता है.


