पटना ( PATNA) : बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावनाओं के बीच एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर कई जटिल सवाल उभर आए हैं. हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में कुछ बातें लगभग स्पष्ट मानी जा रही हैं लेकिन कई ऐसे पेंच हैं जिनका सुलझना अभी बाकी है.
मुख्यमंत्री पद को लेकर है सबसे बड़ा सवाल, खींचतान तेज
सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री पद को लेकर है. सूत्रों के अनुसार इस पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है और यह लगभग तय माना जा रहा है कि अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा लेकिन इसके साथ ही सत्ता साझेदारी को लेकर सहयोगी दलों के बीच खींचतान भी तेज हो गई है. मुद्दा सिर्फ मुख्यमंत्री पद का नहीं है बल्कि अहम विभागों और संवैधानिक पदों के बंटवारे को लेकर भी बातचीत जारी है. विधानसभा अध्यक्ष पद किस पार्टी के हिस्से जाएगा गृह मंत्रालय किसके पास रहेगा ये सभी सवाल फिलहाल अनुत्तरित हैं.
सूत्रों की मानें तो JDU ने BJP के सामने रखी स्पष्ट शर्त
सूत्रों की मानें तो जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू ने भारतीय जनता पार्टी के सामने एक स्पष्ट शर्त रखी है. जदयू का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा तो वर्तमान में बीजेपी के पास मौजूद कई प्रमुख विभाग जदयू को सौंपे जाएं. इनमें विधानसभा अध्यक्ष पद, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग और उद्योग विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय शामिल हैं. इसके बदले में जदयू के पास जो विभाग हैं वे बीजेपी को दिए जा सकते हैं. इस प्रस्ताव के जरिए जदयू सत्ता संतुलन बनाए रखने और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत रखने की कोशिश कर रही है.
नीतीश कुमार ने पूरे मामले में गेंद बीजेपी के पाले में डाल दी है
फिलहाल नीतीश कुमार ने इस पूरे मामले में गेंद बीजेपी के पाले में डाल दी है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भारतीय जनता पार्टी इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है. आने वाले दिनों में लिए जाने वाले फैसले न सिर्फ बिहार की राजनीति की दिशा तय करेंगे बल्कि एनडीए के भीतर समीकरणों को भी नए सिरे से परिभाषित करेंगे.
Thenewspost - Jharkhand
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