पटना (PATNA): आने वाले समय में जल संकट से निपटने के लिए बिहार सरकार ने मजबूत और दूरदर्शी कदम उठाए हैं. जल-जीवन-हरियाली” अभियान के तहत राज्य में वर्षा जल संचयन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है. इसका असर अब जमीन पर भी साफ दिखने लगा है, जहां हजारों सरकारी भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जा चुके हैं.
ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, पिछले सात वर्षों में बिहार भर में 14,600 से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं स्थापित की गई हैं. इनका उद्देश्य बारिश के पानी को संरक्षित कर भूजल स्तर को बढ़ाना और भविष्य के जल संकट को कम करना है. विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भवनों पर ऐसे सिस्टम लगाने का कार्य लगातार जारी है.
इस योजना के तहत स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सरकारी कार्यालय और अन्य सार्वजनिक भवनों को प्राथमिकता दी गई है. इन इमारतों की छतों पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था विकसित कर पानी को जमीन में पहुंचाने का काम किया जा रहा है, जिससे भूगर्भ जल का स्तर बेहतर हो सके.
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2019-20 में सबसे ज्यादा 6,753 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए. इसके बाद 2020-21 में 5,752, 2021-22 में 703, 2022-23 में 344, 2023-24 में 115, 2024-25 में 595 और 2025-26 में अब तक 403 संरचनाएं स्थापित की जा चुकी हैं.
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि “जल-जीवन-हरियाली” अभियान के जरिए राज्य में जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भूजल पुनर्भरण में अहम भूमिका निभा रहे हैं और यह भविष्य के लिए एक स्थायी समाधान साबित हो रहे हैं. कुल मिलाकर, यह पहल न केवल जल संकट से निपटने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी बिहार को मजबूत बना रही है.
Thenewspost - Jharkhand
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