Bihar Polittics : बदलती बिहार की राजनीति: कुर्सी छोड़ने से पहले नीतीश कुमार की 24 दिनों में 38 सभाओं का क्या है मतलब?

    बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने “समृद्धि यात्रा” के तहत 24 दिनों में राज्य के अलग-अलग स्थानों पर 38 सभाएं कीं. इस दौरान उन्होंने जनता की समस्याएं सुनीं और समाधान का प्रयास किया. यात्रा के दौरान लगभग 16,393 करोड़ रुपये की 9,586 विकास योजनाओं की घोषणा की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य विकास कार्यों में तेजी लाना और बिहार को देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल करना है.

    Bihar Polittics : बदलती बिहार की राजनीति: कुर्सी छोड़ने से पहले नीतीश कुमार की 24 दिनों में 38 सभाओं का क्या है मतलब?

    धनबाद(DHANBAD) : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं.  मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा को कई एंगल से देखा जा रहा है.  वैसे मुख्यमंत्री समृद्धि यात्रा के दौरान 24 दिनों में बिहार के विभिन्न जगहों पर कुल 38 सभाएं की.  लोगों की समस्याएं सुनी और उनका निदान करने का प्रयास किया।  एक आंकड़े के मुताबिक नीतीश कुमार ने 16393 करोड़ की 9586 विकास योजनाओं की बिहार को सौगात दी.  अपनी सभाओं  में उन्होंने समृद्धि यात्रा के उद्देश्य पर भी प्रकाश डालते रहे.  उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में तेजी लाना एवं देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में बिहार को शामिल करना उनका  लक्ष्य है.  

    2005 से अबतक नीतीश कुमार ने की हैं 16 यात्राएं

    जानकार बताते हैं कि 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने अब तक 16 यात्राएं की हैं.  न्याय यात्रा से इसकी शुरुआत हुई और अब समृद्धि यात्रा तक पहुंची है.  मुख्यमंत्री सबसे पहले 16 जनवरी को पश्चिम चंपारण पहुंचे, 17 जनवरी को पूर्वी चंपारण, 19 जनवरी को सीतामढ़ी एवं शिवहर, 20 जनवरी को गोपालगंज, 21 जनवरी को सारण, 22 जनवरी को सिवान, 23 जनवरी को मुजफ्फरपुर, 24 जनवरी को वैशाली, फिर 27 जनवरी को मधुबनी, 28 जनवरी को दरभंगा, 29 जनवरी को समस्तीपुर, 10 मार्च को सुपौल, 11 मार्च को अररिया , 12 मार्च को पूर्णिया, 13 मार्च को सहरसा, 14 मार्च को बेगूसराय, 17 मार्च को भागलपुर, 18 मार्च को जमुई, 19 मार्च को मुंगेर, 20 मार्च को गया जी, 23 मार्च को जहानाबाद, 24 मार्च को कैमूर, 25 मार्च को बक्सर में समृद्धि यात्रा को लेकर पहुचें।  उन्होंने हर जिलों को विकास योजनाओं की सौगात दी. 

    आखिर विधान पार्षद से नीतीश कुमार कब देंगे इस्तीफा 
     
    इधर, नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं.  सबकी नजर उनके मामले में टिकी हुई है.  वह राज्यसभा के सदस्य चुन लिए गए है.  नियम के अनुसार उन्हें 30 मार्च तक विधान पार्षद के सदस्य से इस्तीफा देना पड़ सकता है. हालांकि उसके छह महीने तक वह सीएम रह सकते है.  यह बताना भी जरूरी है कि वर्चुअल इस्तीफा का अभी कोई प्रावधान नहीं किया गया है.  इधर, बिहार में एक राजनीतिक घटनाक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन रविवार को अपने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया।  बताया जाता है कि नितिन नवीन असम के लिए रवाना हो गए हैं.  असम में चुनाव होने वाले है.  नितिन नवीन के इस्तीफा के लिए भी 30 मार्च का डेड  लाइन तय है.  वह अभी राज्यसभा के सदस्य चुने गए है.  नितिन नवीन के इस्तीफा को स्वीकार करने के लिए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार पटना आ गए थे.  लेकिन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन असम रवाना हो गए. चुकि  30 मार्च को नितिन नवीन और नीतीश कुमार के इस्तीफे का अंतिम दिन है. इसलिए राजनीतिक हलकों  में यह  चर्चा तेज हो गई कि आखिर इस्तीफा दिए बगैर नितिन नवीन असम क्यों रवाना हो गए? नीतीश कुमार क्या करेंगे??

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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