पटना: खनन विभाग की बड़ी उपलब्धि! 3592 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व, बालू लीज़ सरेंडर करने वाली कंपनियों पर कड़ा एक्शन

    बिहार के खान एवं भूतत्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3592.60 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व संग्रह कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के 3536.21 करोड़ रुपये की तुलना में 56.39 करोड़ रुपये अधिक है.

    पटना: खनन विभाग की बड़ी उपलब्धि! 3592 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व, बालू लीज़ सरेंडर करने वाली कंपनियों पर कड़ा एक्शन

    पटना (PATNA): बिहार के खान एवं भूतत्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3592.60 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व संग्रह कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के 3536.21 करोड़ रुपये की तुलना में 56.39 करोड़ रुपये अधिक है. उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी.

    उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य 3850 करोड़ रुपये का था और कुछ तकनीकी कारणों से 31 मार्च तक करीब 309 करोड़ रुपये प्राप्त नहीं हो सके. हालांकि, विभिन्न विभागों और एजेंसियों से यह राशि मिलते ही कुल राजस्व 3800 करोड़ रुपये के लक्ष्य को पार कर सकता है. विभाग को रेलवे, ग्रामीण कार्य विभाग, सीपीडब्ल्यूडी और पटना मेट्रो से भुगतान मिलने की उम्मीद है.

    विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि इस वर्ष 78 बालू घाटों के सरेंडर होने के बावजूद विभाग ने बेहतर प्रदर्शन किया. इन घाटों के सरेंडर से लगभग 600 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का सामना करना पड़ा. साथ ही कार्य विभागों से मिलने वाले राजस्व में भी कमी आई, जिससे करीब 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ.

    सरकार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला लिया है. मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन कंपनियों ने बालू खनन की लीज़ सरेंडर की है, उन्हें भविष्य में नए टेंडर में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी. विभाग का मानना है कि सख्त निगरानी और अवैध खनन पर कार्रवाई के चलते कई कंपनियों ने लीज़ छोड़ी है. फिलहाल 12 बालू घाटों के लिए नए टेंडर जारी कर दिए गए हैं.

    राज्य के 21 जिलों ने अपने निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व संग्रह किया है, जिसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी गई. इसके अलावा “बिहारी खनन योद्धा पुरस्कार” के तहत 96 लोगों के खातों में कुल 4.90 लाख रुपये भी ट्रांसफर किए गए हैं.

    राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से विभाग ने 30 ब्लॉकों में स्टोन माइनिंग लीज़ चिन्हित की है. इससे न केवल राज्य में पत्थरों के आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.


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