Good News: बिहार की नीतीश कुमार सरकार भिक्षा मांगने वाले को ऐसे बना रही उद्यमी, भिक्षावृत्ति रोकने की दमदार पहल!

    Good News: बिहार की नीतीश कुमार सरकार भिक्षा मांगने वाले को ऐसे बना रही उद्यमी, भिक्षावृत्ति रोकने की दमदार पहल!

    TNP DESK- क्या आप जानते हैं  कि बिहार में भिक्षा मांगने वाले भी उद्यमी बन सकते है. नहीं जानते है तो आइये हम बताते है कि कैसे यह सपना हो सकता है पूरा. बिहार में भीख मांग कर जीवन यापन करने वाले भी उद्यमी बन सकते हैं, बसर्ते  उन्हें कुछ प्रयास करने होंगे.  उन्हें जानना होगा कि बिहार सरकार भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए मुख्यमंत्री भिक्षा  निवारण योजना चला  रही है.  इसके लिए भिक्षुक पुनर्वास गृह  भी चलाए जा रहे है.  भिक्षुकों को उद्योगपति बनने के लिए उन्हें बिहार का मूल निवासी होना होगा.  आवेदक और उसका परिवार भिक्षावृत्ति पर निर्भर होना चाहिए.  इसके लिए कोई उम्र सीमा नहीं है.  बच्चो  और बुजुर्ग  के लिए स्पेशल प्रावधान किया गया है.  

    लाभ लेने वालों को देने होंगे कई प्रमाणपत्र ,यहां से मिल सकता है सर्टिफिकेट 

    जो लोग योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें आर्थिक स्थिति को बताने वाला प्रमाण पत्र  देना होगा. यह  तहसीलदार या संबंधित पदाधिकारी से प्राप्त किया जा सकता है.  अगर विकलांग है या कोई गंभीर बीमारी है, तो डॉक्टर से निर्गत प्रमाण पत्र होना चाहिए.  योजना के मुताबिक लाभ लेने वाले इच्छुक लोगों को जिले के सामाजिक सुरक्षा कोषांग या जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई में जाना होगा.  संबंधित अधिकारी से संपर्क कर मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के लिए आवेदन फॉर्म भरना होगा.  नियम के मुताबिक फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद योग्य भिक्षुओं को  इस योजना का लाभ दिया जाएगा.  बहुत कम लोग जानते होंगे कि बिहार सरकार यह  योजना चला  रही है.  जानकारी के अनुसार बिहार के 10 जिलों में 19  भिक्षुक पुनर्वास गृह  संचालित है.  इसमें भीख मांगने वालो  को रहना, खाना और सुरक्षित जीवन के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. 

    भिक्षुकों को स्वरोजगार  के लिए ₹10,000 तक की आर्थिक मदद की जाती 

     इसके लिए भिक्षुकों को स्वरोजगार करने के लिए सरकार की ओर से₹10,000 तक की आर्थिक मदद की जाती है.  इसके अलावा शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास जैसे कई लाभ भी दिए जाते है.  एक आंकड़े के मुताबिक वर्तमान में 544 शिक्षकों को आर्थिक सहायता दी गई है.  सूत्रों के अनुसार बिहार में भिक्षुकों के पुनर्वास के लिए 6 सक्षम उत्पादक समूह संचालित है.  जहां उन्हें तमाम कौशल विकास के कोर्स कराए जाते है.  यह समूह अगरबत्ती, नारियल झाड़ू , चप्पल तथा जुट  के  उत्पादों का निर्माण और बिक्री करते है.  प्राप्त आय को बनाने वालो  में वितरित किया जाता है.  इसके अलावा पटना, गया ,नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण जिले में 19 पुनर्वास गृह  संचालित है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  



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