पटना(PATNA): बिहार में कृषि क्षेत्र को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. राज्य सरकार अब खेती-किसानी को पूरी तरह डिजिटल सिस्टम से जोड़ने पर तेजी से काम कर रही है. इसी क्रम में कृषि विभाग ने ‘एग्रीस्टैक’ और ‘डिजिटल क्रॉप सर्वे’ (DCS) की ताज़ा रिपोर्ट पेश की है, जिसमें किसानों के पंजीकरण से लेकर फसल डेटा तक बड़े पैमाने पर अपडेट साझा किए गए हैं.
इस समीक्षा बैठक में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि डिजिटल कृषि ढांचे को और मजबूत किया जाए ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ तेजी के साथ मिल सके. उन्होंने खास तौर पर राजस्व विभाग के स्तर पर लंबित करीब 8.22 लाख आवेदनों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए मिशन मोड में काम करने का आदेश दिया है.
इसके साथ ही राज्य के 15,400 से अधिक गांवों के मानचित्र डेटा को पूरा करने में हो रही देरी पर चिंता जताई गई और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के समन्वय से इस कार्य को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया गया.
अब तक बिहार में 47,85,386 किसानों का पंजीकरण एग्रीस्टैक पोर्टल पर किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 55.41 प्रतिशत है. इस प्रक्रिया में वैशाली (112%) और शिवहर (101%) जैसे जिले सबसे आगे हैं, जो डिजिटल सिस्टम को अपनाने में अग्रणी साबित हो रहे हैं.
डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत राज्य के 30,416 गांवों में से 30,015 गांवों में सर्वे का कार्य शुरू हो चुका है. अब तक 1.82 करोड़ से अधिक खेतों (प्लॉट्स) का डिजिटल सर्वे पूरा किया जा चुका है, जिससे कृषि डेटा का एक विशाल डिजिटल डेटाबेस तैयार हो रहा है.
फसल पैटर्न की बात करें तो सर्वे में सामने आया है कि राज्य के 24.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं (60.75%) और मक्का (14.74%) प्रमुख फसलें हैं. इसके अलावा मखाना, केला और लीची जैसी नकदी फसलों का भी विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे कृषि योजनाओं को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा.
मुख्य सचिव ने कहा कि एग्रीस्टैक सिर्फ एक डेटा प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह खेती को “फसल उत्पादन से फसल बुद्धिमत्ता” की ओर ले जाने वाला एक बड़ा डिजिटल कदम है. इससे न केवल सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आपदा प्रबंधन, बीमा और कृषि ऋण प्रणाली में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.

