बिहार में डेटा-आधारित शासन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने को लेकर ठोस पहल, योजनाओं का SDGs के साथ समन्वय जरुरी

    Bibsr news:बिहार में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए बिहार में डेटा-आधारित शासन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में निरंतर ठोस पहल की जा रही है.इसके तहत योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने गुरुवार को फुलवारी स्थित एक निजी होटल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि “विकास को वास्तविक गति देने के लिए योजनाओं का एसडीजी के साथ प्रभावी समन्वय अत्यंत आवश्यक है

    बिहार में डेटा-आधारित शासन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने को लेकर ठोस पहल, योजनाओं का SDGs के साथ समन्वय जरुरी

    पटना(PATNA):बिहार में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए बिहार में डेटा-आधारित शासन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में निरंतर ठोस पहल की जा रही है.इसके तहत योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने गुरुवार को फुलवारी स्थित एक निजी होटल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि “विकास को वास्तविक गति देने के लिए योजनाओं का एसडीजी के साथ प्रभावी समन्वय अत्यंत आवश्यक है.सतत विकास लक्ष्यों के मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, पर्यावरणीय लेखांकन एवं जेंडर सांख्यिकी’ विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन अवसर पर उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एसडीजी के स्थानीयकरण को प्राथमिकता देते हुए जिला स्तर तक एक सुदृढ़ एवं प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित कर रही है, जिससे योजनाओं की प्रगति का सटीक आकलन सुनिश्चित किया जा सके.

    राज्य की नीति निर्माण क्षमता को नई दिशा प्रदान करेगा

     मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि सटीक एवं प्रभावी नीति निर्माण के लिए डेटा गैप्स की पहचान, जेंडर-संवेदनशील आंकड़ों का सृजन तथा पर्यावरणीय लेखांकन का समावेश राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताएं है उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महिलाओं एवं पुरुषों के बीच मौजूद असमानताओं को बेहतर ढंग से समझकर ही समावेशी एवं न्यायसंगत नीतियां तैयार की जा सकती है.डॉ. विजयलक्ष्मी ने कहा कि पर्यावरणीय लेखांकन को नीति निर्माण में शामिल कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है उन्होंने उल्लेख किया कि इस प्रकार का राष्ट्रीय स्तर का कार्यशाला बिहार में पहली बार आयोजित किया गया, जो राज्य की नीति निर्माण क्षमता को नई दिशा प्रदान करेगा.

    राष्ट्रीय कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए बधाई 

    इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव ने योजना एवं विकास विभाग के माननीय मंत्री, बिहार सरकार के मुख्य सचिव तथा भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन एवं गरिमामयी उपस्थिति ने इस कार्यशाला को अत्यंत सफल एवं सार्थक बनाया उन्होंने समापन अवसर पर पूरे योजना एवं विकास विभाग की टीम को इस राष्ट्रीय कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए बधाई दी.विशेष रूप से आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES) की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि निदेशक रंजीत कुमार के नेतृत्व में टीम ने अत्यंत समर्पण, दक्षता एवं उत्कृष्ट समन्वय के साथ इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया.यह दो दिवसीय राष्ट्रीय योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार तथा सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसमें देश के लगभग 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

    मुख्य उद्देश्य एसडीजी मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क को सुदृढ़ करना

    कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य एसडीजी मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क को सुदृढ़ करना, इंडिकेटर आधारित प्रगति की प्रभावी ट्रैकिंग सुनिश्चित करना तथा राज्यों की सांख्यिकीय क्षमता को सशक्त बनाना रहा. इसके अंतर्गत डेटा गैप की पहचान, डेटा गुणवत्ता में सुधार तथा प्रशासनिक एवं सर्वेक्षण आधारित आंकड़ों के एकीकरण पर विशेष बल दिया गया, ताकि नीति निर्माण के लिए विश्वसनीय एवं अद्यतन आंकड़े उपलब्ध हो सकें.आपको बताएं कि 18 मार्च 2026 को इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन योजना एवं विकास विभाग के माननीय मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा किया गया था.इस अवसर पर बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग, यूएनडीपी भारत की रेजिडेंट प्रतिनिधि डॉ. एंजेला लुसिगी, एमओएसपीआई के अपर महानिदेशक श्री एस.सी. मलिक सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

    शीर्षक पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया

    कार्यक्रम के दौरान योजना एवं विकास विभाग, बिहार द्वारा प्रकाशित तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों — “Bihar SDG Progress Report 2025”, “Gender and SDG Progress Report 2025” एवं “बिहार: एक झलक” — का विमोचन किया गया. इसके अतिरिक्त, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “Environmental Accounting Explainer Series: Pollination Services” का डिजिटल विमोचन तथा “Planet in Focus: Advancing Environmental Sustainability under the SDGs” एवं “Delivering Prosperity at Scale: India’s Economic Transformation through the SDGs” शीर्षक पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया.समापन सत्र में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार के अपर महानिदेशक एस. सी. मलिक , महानिदेशक श्री एन. के. संतोषी, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार से आए पदाधिकारी जिया उल हक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए बिहार सरकार द्वारा किए गए उत्कृष्ट आयोजन की सराहना की. धन्यवाद ज्ञापन देते हुए गण्यमान्य अतिथियों ने विशेष रूप से राज्य की समृद्ध संस्कृति, अतिथ्य परंपरा एवं खान-पान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां की व्यवस्था अत्यंत उत्कृष्ट रही उन्होंने पारंपरिक व्यंजनों, विशेषकर चंपारण मटन, का उल्लेख करते हुए इसे एक यादगार अनुभव बताया। मधुबनी कला एवं टिकुली कला जैसी बिहार की समृद्ध लोक कलाओं की सराहना की तथा कार्यशाला के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम को अत्यंत आकर्षक, आनंददायक एवं प्रतिभागियों के लिए एक सुकून देने वाला अनुभव बताया उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल ज्ञान-विनिमय को बढ़ावा देते है, बल्कि राज्यों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सुदृढ़ करते है.


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