बिहार : राजद प्रदेश अध्यक्ष से क्यों छुट्टी होगी मंगनी लाल मंडल की, नीतीश तेजस्वी किसे साधने निकलेंगे यात्रा पर!


धनबाद(DHANBAD): बिहार में चुनाव हारने के बाद राजद पर टूट का खतरा मंडरा रहा है. एनडीए नेताओं का दावा है कि संक्रांति के बाद राजद में टूट हो जाएगी. हालांकि तेजस्वी यादव विदेश दौरे से लौट आए हैं और माना जा रहा है कि संगठन को अब नए तरीके से तैयार करने की कोशिश हो रही है. सूत्रों के अनुसार राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की छुट्टी हो सकती है. किसी नए चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. पार्टी में कुछ भितरघातियों को भी चिन्हित किया गया है. उन पर भी एक्शन लिया जा सकता है. बताया जा रहा है की मंगनी लाल मंडल को जिस सोच के साथ पार्टी की कमान दी गई थी, उसमें कामयाबी नहीं मिली. चुनाव में पार्टी पर वोटरों ने भरोसा नहीं किया. कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के ठीक पहले मंगनी लाल मंडल को पार्टी की कमान सौंप गई थी. उम्मीद की गई थी कि गैर यादव, ओबीसी वोट बैंक को राजद के पाले में वह ले आएंगे.
क्यों हटाए जा सकते हैं मंगनी लाल मंडल ? क्या है आगे की योजना
लेकिन ऐसा नहीं हो सका. यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी में वह अनुशासन कायम नहीं रख सके. पूर्व अध्यक्ष जगदानंद सिंह की तरह अनुशासन कायम रखने में वह विफल रहे. चुनाव के पहले और बाद में भी संगठन में ढीलापन देखा गया. इधर, राजद को लेकर कई बातें सामने आ रही है. यह भी कहा जा रहा है कि दोनों भाइयों के बीच विवाद की बर्फ अब पिघलने लगी है. दोनों भाई साथ में चूड़ा -दही खा सकते है. इधर, विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक बार फिर सियासी मैदान में सक्रिय होने की तैयारी में लग गए है. तेजस्वी यादव अभी पटना नहीं पहुंचे हैं, लेकिन उनकी रणनीति को लेकर राजधानी में हलचल तेज हो गई है. खरमास के बाद प्रस्तावित बिहार यात्रा को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई है. तेजस्वी यादव की यात्रा केवल जनसंपर्क तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का प्रयास भी होगा.
तेजस्वी यादव की यात्रा का मकसद संगठन को मजबूत करना होगा
यात्रा के दौरान वह पार्टी के जिला अध्यक्षों, प्रखंड अध्यक्षों ,प्रधान महासचिव समेत नए पुराने संगठन पदाधिकारी से भेंट करेंगे. इन बैठकों में संगठन की कमजोरी, कार्यकर्ताओं को भूमिका और आगामी राजनीति पर विस्तार से चर्चा हो सकती है. साथ ही जमीनी फीडबैक भी लेंगे. दूसरी और सत्ता पक्ष भी चुप नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खरमास के बाद यात्रा की तैयारी है. उनकी यात्रा का उद्देश्य विकास और कल्याणकारी योजनाओं को देखना- समझना और अधिकारियों से फीडबैक लेना बताया जा रहा है. कहा जा सकता है कि एक ओर तेजस्वी यादव संगठन को साधने निकलेंगे तो नीतीश कुमार सरकारी योजनाओं की समीक्षा के लिए मैदान में उतरेंगे. खरमास के बाद बिहार में राजनीति और गरम होगी. यात्राओं का दौर शुरू होगा. दोनों की सक्रियता से बिहार में नई राजनीतिक तपिश देखने को मिलेगी.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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