बिहार चुनाव: महागठबंधन में सिरफुटव्वल से एक दर्जन सीटों पर फ्रेंडली फाइट, उधर NDA की सरपट दौड़, नीतीश की वापसी लगभग तय!

    बिहार चुनाव: महागठबंधन में सिरफुटव्वल से एक दर्जन सीटों पर फ्रेंडली फाइट, उधर NDA की सरपट दौड़, नीतीश की वापसी लगभग तय!

    पटना(PATNA): बिहार की  सियासत देश में चर्चा में बनी है. चुनाव से पहले महागठबंधन में एकजुटता दिखी. लेकिन चुनाव की घोषणा के साथ ही घमासान मच गया. और एक एक कर कई आरोप गठबंधन पर लग रहे है. आपस में ही गठबंधन के नेता कई सीट पर लड़ रहे है. तो दूसरी ओर अब इसे मुद्दा बना कर एनडीए ने हुंकार भर दिया. जिससे तस्वीर साफ है कि बिहार में फिर से नीतीश की वापसी तय मानी जा रही है.    

    इंडिया में समन्वय की कमी

    इसके पीछे की वजह साफ है कि इंडी गठबंधन में चुनाव से पहले कई राउंड की बैठक हुई. लेकिन जब चुनाव की घोषणा हुई तो समन्वय की कमी दिखी. यही वजह है कि आपसी समन्वय की कमी की वजह से 10 सीट पर कांग्रेस-राजद-सीपीआई-वीआईपी आपस में ही लड़ाई में कूद गई. जिससे वोट का बिखराव होना तय माना जा रहा है. साथ ही सीट को लेकर नामांकन के आखरी समय तक खीच तान देखने को मिला. जिससे सवाल उठा की क्या बिहार के चुनाव में इंडी गठबंधन ने एनडीए को वाल्क ओवर दे दिया.

    टिकट बिक्री का आरोप

    सीट बटवारे पर पेंच फसने के साथ ही राजद और कांग्रेस पर कई कद्दावर का टिकट काटने का मामला भी गर्म है. राजद के बड़े नेताओं से लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर चुनाव में टिकट बिक्री का आरोप लग गया और एक audio भी वायरल हुआ. जिसमें पैसे के बिना टिकट नहीं देने की बात कही जा रही है. इसके बाद राजद के नेता ने तो तेजस्वी के सबसे करीबी संजय यादव को लेकर गंभीर आरोप लगा दिया.  मीडिया के सामने कहा कि टिकट के बदले 3 करोड़ की डिमांड की जा रही है.

    AIMIM ने बिगाड़ा मुस्लिम वोट का समीकरण

    इस चुनाव में गठबंधन के घमासान के साथ साथ राजद के सामने एक बड़ी समस्या AIMIM भी बन गए. सीमांचल में मुस्लिम वोटर तय करते है कि कौन चुनाव में जीत कर विधानसभा पहुंचेगा. लेकिन इस बार AIMIM ने यह खेल भी बिगाड़ दिया और सीमांचल के साथ साथ 25 सीट पर उम्मीदवार उतार दिया. इतना ही नहीं एक नया गठबंधन बना लिया जिसमें पशु पति पारास,भीम आर्मी शामिल है. ऐसे में मुस्लिम के साथ दलित वोट पर नजर इस गठबंधन की है. जो अब तक मोटे तौर पर कांग्रेस-राजद के खाते में जाता है.

    मजबूत स्थिति  में नहीं इंडिया गठबंधन

    ऐसे में तीन ऐसे फैक्टर है,जिससे यह माना जा रहा है कि इस बार नीतीश कुमार की वापसी तय है. क्योंकि चुनाव में मजबूती से इंडिया गठबंधन नहीं दिख रही है. सभी मुद्दे खुद बैक फायर हो रहे है. साथ ही सबसे बड़ा आरोप यह है कि चुनाव के समय मुस्लिम मतदाताओं को इस्तेमाल किया जाता है. टिकट के समय राजद और कांग्रेस ने उन्हे दरकिनार किया. जिसका खामियाजा इस चुनाव में दिख सकता है.

    इंडिया में अंतर्कलह और नीतीश की योजना से एनडीए की वापसी तय                       

    अब एनडीए की वापसी और नीतीश की ताजपोशी पर बिहार में चर्चा है कि इंडिया में सिरफुटववल और नीतीश के हाल में लिए निर्णय का सीधा फायदा मिलता दिख रहा है. खास कर महिला रोजगार योजना के तहत राज्य की एक करोड़ महिलाओं को पैसा भेजना भी एक जीत का बड़ा मोड माना जा रहा है.    


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