पटना (PATNA): बिहार में सीमावर्ती गांवों की तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पटना में आयोजित एक अहम कार्यशाला में “वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II” को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की रणनीति तैयार की गई. इस पहल का मकसद गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और विकास की रफ्तार को तेज करना है.
कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने की. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II सीमावर्ती क्षेत्रों के सतत और समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के क्रियान्वयन में बेहतर तालमेल, डेटा आधारित मॉनिटरिंग और फील्ड स्तर पर सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि तय लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके. इस दौरान गृह विभाग की विशेष सचिव के. एस. अनुपम ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है. उन्होंने सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया.
कार्यक्रम में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के डीआईजी मुकेश कुमार ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में विकास कार्य स्थानीय लोगों के भरोसे और सहभागिता को मजबूत करते हैं. वहीं, गृह मंत्रालय के निदेशक (VVP) मनीष श्रीवास्तव ने इस योजना के राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके जरिए सीमावर्ती गांवों को बुनियादी सुविधाएं, रोजगार और कनेक्टिविटी से जोड़ा जा रहा है.
तकनीकी सत्र में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक दीपक कुमार ने डेटा प्रबंधन, डिजिटल मॉनिटरिंग और आईटी आधारित समाधानों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी. इस कार्यशाला में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और सहरसा सहित सीमावर्ती जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े. कार्यक्रम में अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सुझाव भी दिए.


