नालंदा (NALANDA): जिले में साल 2025 और 2026 के दौरान भ्रष्टाचार के कई बड़े मामले सामने आए हैं. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की लगातार कार्रवाई में पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, बिजली और आंगनबाड़ी विभाग के 14 अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए हैं. सिर्फ वर्ष 2026 में ही छह बड़ी ट्रैप कार्रवाई की गई, जिससे जिले में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि नगरनौसा प्रखंड भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. मार्च से मई 2026 के बीच यहां कई बड़े ट्रैप केस सामने आए. वहीं 25 अप्रैल 2026 को हुई कार्रवाई सबसे बड़ी मानी जा रही है, जब राजगीर थाने के एसआई देवकांत कुमार को 90 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया. यह राशि 2025-26 की सबसे बड़ी ट्रैप रकम बताई जा रही है.
स्वास्थ्य विभाग में भी भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर हुए हैं. आशा कार्यकर्ता बहाली के नाम पर नगरनौसा पीएचसी में तैनात बीसीएम मनजीत कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया. वहीं इस्लामपुर स्वास्थ्य विभाग के बीसीएम आशुतोष कुमार को 40 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया. दोनों मामलों में बहाली प्रक्रिया के बदले पैसे मांगने का आरोप था.
आंगनबाड़ी विभाग भी निगरानी की कार्रवाई से नहीं बच सका. नगरनौसा की महिला पर्यवेक्षिका सुषमा कुमारी को पोषाहार पंजी पर हस्ताक्षर और अन्य सरकारी कार्यों के बदले 3,200 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया.
शिक्षा विभाग में भी कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई. चंडी बीआरसी में संसाधन शिक्षक मनोज कुमार वर्मा को 17 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया. पूछताछ के दौरान बीईओ पुष्पा कुमारी का नाम भी सामने आया. इसके अलावा हिलसा में डीपीओ अनिल कुमार और शिक्षक संजय कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया. वहीं बिहारशरीफ डीईओ कार्यालय के पूर्व लिपिक राज किशोर सिन्हा को घूस मामले में अदालत ने दो साल की सजा सुनाई.
राजस्व विभाग में भी कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आए. राजगीर अंचल के राजस्व कर्मचारी अखिलेश साह को जमीन परिमार्जन के नाम पर 45 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया. वहीं करायपरसुराय के हल्का कर्मचारी संजय कुमार को 4,500 रुपये घूस लेते पकड़ा गया.
बिजली विभाग भी निगरानी टीम के रडार पर रहा. इस्लामपुर बिजली विभाग के जेई नीतीश कुमार और कर्मचारी देवेंद्र कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया. लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बताया जा रहा है कि अंचल, थाना और कई सरकारी कार्यालयों में कमीशन और गिफ्ट के नाम पर रिश्वतखोरी व्यवस्था का हिस्सा बनती जा रही है. जिला निगरानी समिति को हर साल बड़ी संख्या में शिकायतें मिलती हैं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने से भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है. वहीं अधिकांश सरकारी कार्यालयों में निगरानी समिति का संपर्क नंबर तक प्रदर्शित नहीं होने से आम लोगों को शिकायत दर्ज कराने में भी परेशानी होती है.

