कौन है कल्पना! जिस दांव में उलझती नजर आने लगी है भाजपा! आदिवासी-मूलवासियों के साथ ही राज्य की आधी आबादी को साधने का सियासी औजार तो नहीं

    कौन है कल्पना! जिस दांव में उलझती नजर आने लगी है भाजपा! आदिवासी-मूलवासियों के साथ ही राज्य की आधी आबादी को साधने का सियासी औजार तो नहीं

    Ranchi: झारखंड की सियासत में आशंकाओं के बादल तेजी मंडरा रहे हैं, आज पूरे झारखंड की नजर सीएम हेमंत के साथ ईडी की पूछताछ को लेकर हैं, इस पूछताछ के संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं और इसकी अंतिम परिणति किस रुप में हो सकती है, इसको लेकर लोगों की चिंताएं और उत्सुकता एक साथ बनी हुई है, लेकिन जब से इस सियासी संकट के बीच कल्पना सोरेन के नाम की इंट्री हुई है, अचानक से यह सवाल तेज हो गया है कि यह कल्पना कौन हैं? क्योंकि अब तक आम लोगों के बीच एक राजनेता के रुप में किसी कल्पना सोरेन की चर्चा भी नहीं होती थी. लेकिन जैसे ही सियासी गलियारों से निकल कर कल्पना सोरेन का नाम आम लोगों के बीच तक पहुंचा, कल्पना सोरेन के बारे में जानने की उत्कंठा तेज हो गयी. अचानक से सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न बेवसाइटों पर उन्हे खंगाला जाने लगा.

    पिछले दो दशक से झारखंड की बदलती सियासत पर नजर जमाये हैं कल्पना

    दरअसल कल्पना सोरेन झारखंड की सियासत में एक नया नाम भले ही हो, लेकिन पिछले करीब दो दशक कल्पना सोरेन की नजर झारखंड के बदलते हर सियासी रंग पर बनी हुई है और सीएम हेमंत की यही कल्पना अब झारखंड की कल्पना बनती नजर आ रही हैं. इस कहानी को ज्यादा उलझान के बजाय हम मूल मुद्दे पर आते हैं, तो हम बता दें कि कल्पना सोरेन और कोई नहीं सीएम हेमंत की पत्नी है. मूल रुप से ओडिशा के मयूरभंज की रहने वाली कल्पना का जन्म सन 1976 में इसी रांची में हुआ था, और रांची से ही उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की हैं. सात फरवरी 2006 को उनका हेमंत सोरेन के साथ अरेंज मैरेज हुआ, कल्पना सोरेन भले ही राज्य के बड़े सियासी परिवार से जुड़ी हो, लेकिन उनकी रुचि और कार्यक्षेत्र अलग है. वह एक कामयाब बिजनेश वुमन होने के साथ ही एक प्ले स्कूल का संचालन भी करती हैं. इस प्रकार देखा जाय तो वह एक सेल्फ मेड वुमन हैं, और दैनिक जिंदगी के खर्चों के लिए अपने पति पर निर्भर नहीं है, बात रही उनकी पारिवारिक जिंदगी की तो उनके दो बच्चे हैं.

    गुगल में कल्पना सोरेन के बारे में सर्च तेज

    हालांकि यहां यह भी साफ कर दें कि राज्य के अगले मुखिया के रुप में कल्पना सोरेन की ताजपोशी को लेकर झामुमो की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है, राज्य की कमान बदलने के ये सारे दावे भाजपा और मीडिया के द्वारा सूत्रों के हवाले किया जा रहा है, बावजूद इसके अचानक से गुगल में कल्पना सोरेन के बारे में सर्च तेज हो चुकी है. लोग उनकी जिंदगी से जुड़े पहलुओं को जानने की कोशिश करने लगे हैं. यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जिन हाथों में झारखंड की कमान सौंपने के दावे किये जा रहे हैं, वह कल्पना कौन हैं?  जिस पर दांव लगाकर झामुमो 2024 के महासंग्राम के पहले सियासी अखाड़े में उतरने का मन बना रही है.

    राजनीतिक गतिविधियों पर बनी रहती है कल्पना सोरेन की नजर

    हालांकि कल्पना सोरेन राजनीति के इस उठापटक से अपने को दूर रखती हैं, लेकिन राज्य की हर बड़ी छोटी सियासी खबर पर उनकी नजर बनी रहती है, इसके साथ ही सियासी गतिविधियों में हर कदम के साथ सीएम हेमंत के साथ खड़ी नजर आती है, हर सियासी झंझावात में कल्पना सोरेन अब तक एक दीवार बन कर खड़ी नजर आयी है, और यह पहली बार नहीं है कि कल्पना सोरेन की ताजपोशी की खबर सामने आयी हो, इसके पहले भी जब खनन मामले में सीएम हेमंत की सदस्यता पर खतरा पैदा हुआ था, तब भी कल्पना सोरेन का नाम सीएम के लिए उछला था, हालांकि उस बार सीएम हेमंत की सदस्यता पर कोई खतरा पैदा नहीं हुआ, और कल्पना सोरेन की ताजपोशी की नौबत नहीं आयी, लेकिन अब जबकि सीएम हेमंत के उपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है, और खुद झामुमो की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि एक आदिवासी चेहरे को सीएम के रुप में बर्दास्त करने को भाजपा तैयार नहीं है, उसकी मंशा किसी भी आरोप में सीएम हेमंत को 2024 फाइनल मुकाबले के पहले कालकोठरी में बंद करने की है, एक बार फिर से कल्पना का नाम उछलने लगा है.

    हेमंत की गिरफ्तारी को बड़ा सियासी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं महागठबंधन

    दरअसल दावा यह किया जा रहा है कि सीएम हेमंत की गिरफ्तारी की स्थिति में महागठबंधन उनकी गिरफ्तारी को एक झारखंड का सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बनाने की तैयारी में है. लेकिन उस हालत में उसके पास सीएम हेमंत की तरह ही एक तेज तर्रार चहेरे की भी जरुरत होगी, और कल्पना इस सारे पैमाने पर फीट बैठती है, एक तो वह उच्च शिक्षित है, इंजीनियरिंग की डिग्री उनके पास है. दूसरी बात यह भी है कि झारखंड गठन के दो दशक गुजरने के बाद भी आज तक इस राज्य को कोई महिला सीएम नहीं मिला है. इस प्रकार कल्पना को आगे कर महागठबंधन आदिवासी-मूलवासी मतों का ध्रुवीकरण करने के साथ ही राज्य की आधी आबादी में भी अपनी पकड़ को मजबूत बना सकता है.

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