राहुल के स्वागत में लालटेन! घोड़े लेकर पहुंचे राजद समर्थक,मोहब्ब्त की दुकान से पटा पटना

    राहुल के स्वागत में लालटेन! घोड़े लेकर पहुंचे राजद समर्थक,मोहब्ब्त की दुकान से पटा पटना

    Patna- विपक्षी दलों की महाबैठक में पटना पहुंचे राहुल गांधी के स्वागत में राजद कार्यकर्ताओं ने अपनी जान लगा दी है. एयरपोर्ट से लेकर पटना की सड़कों पर लालटेन ही लालटेन दिख रहा है. भाजपा को यह समझ में नहीं आ रहा है कि राहुल गांधी कांग्रेस के सुलतान हैं या राजद का जान, राजद कार्यकर्ता लालटेन सर पर रख एयरपोर्ट की भागते चले जा रहे हैं. राजद कार्यकर्ताओं के इस स्वागत भाव से तो कांग्रेस भी सकते में है, उसे समझ में यह नहीं आ रहा है कि उसने यह तैयारी क्यों नहीं की? जबकि कईयों का सवाल है कि आखिर राहुल गांधी के इस भव्य से स्वागत से तेजस्वी यादव संकेत क्या दे रहे हैं? कहीं यह भविष्य की किसी एक और बड़ी राजनीति का हिस्सा तो नहीं?

    हैरत में भाजपा, राहुल के चेहरे पर मुस्कान

    उधर राहुल गांधी के लिए इस स्वागत गान को देखकर भाजपा भी हैरत में है. उसे समझ में नहीं आ रहा है कि वह किस प्रकार इस पर हमला करे, उस राहुल गांधी को जिसे कभी वह पप्पू कह कर प्रचारित करती थी, इसके लिए अपनी पूरी मिशनरी का इस्तेमाल करती थी, सोशल मीडिया पर अधूरी सच्चाईयों को प्रसारित किया जाता था, आज वह पटना की सड़कों पर नायक क्यों और कैसे बन गया?

    ठग्स ऑफ हिन्दुस्तान

    इस सदमें से बाहर आने की कोशिश में भाजपा इसे ठग्स ऑफ हिन्दुस्तान बता रही है, भाजपा प्रवक्ताओं की पूरी टीम टीवी चैनलों पर हमलावर हैं, विपक्षी दलों की इस बैठक को सत्ता लोभी जमात बतायी जा रही है, कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने यह स्वीकार कर लिया कि उसमें भाजपा को हराने की ताकत नहीं है, यही कारण है कि उसे अपने घूर विरोधी रहे अरबिंद केजरीवाल से लेकर ममता तक से हाथ मिलाना पड़ रहा है.

    एनडीए में भी शामिल है कई दर्जन दल

    हालांकि यह भी एक सच्चाई है कि भाजपा आज जिस एनडीए का हिस्सा है, जिसमें कभी कई दर्जन राजनीतिक दल शामिल थें, और उन्ही दलों की संयुक्त ताकत के बल पर मनमोहन सिंह की सरकार को हटाया गया था, साफ है कि हर राजनीतिक दल बदली हुई परिस्थितियों में अपने सहयोगियों का विस्तार करता है, अभी चंद माह पहले ही अपने सहयोगी पार्टयों को हिकारत की नजर से देखने वाली भाजपा ने भी कर्नाटक की हार के बाद एक बार फिर से एनडीए का विस्तार करने का फैसला किया है, दूसरे क्षेत्रीय दलों को अपने साथ मिलाने के लिए दिन रात मीटिंगों का दौर जारी है. फिर कांग्रेस की यह पहल को सत्तालोभी दलों की जमात कैसे की जा सकती है.    


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