घुप्प अंधेरी रात में गमछी वाले प्रोफेसर साहेब से चिराग की मुलाकात! महागठबंधन को भेदते-भेदते कहीं अपना घर ही तो नहीं भूल गई भाजपा

    घुप्प अंधेरी रात में गमछी वाले नेताजी का आरजेडी के प्रोफेसर साहेब से मुलाकात! महागठबंधन को भेदते भेदते कहीं अपना घर ही तो नहीं भूल गईं भाजपा

    घुप्प अंधेरी रात में गमछी वाले प्रोफेसर साहेब से चिराग की मुलाकात! महागठबंधन को भेदते-भेदते कहीं अपना घर ही तो नहीं भूल गई भाजपा

    Patna-सियासत सिर्फ दिन के उजाले में नहीं होती, सियासत वह भी नहीं होता, जब मीडिया के सामने सियासतदानों के द्वारा अपने विरोधियों पर जहर बूझे तीरों की बरसात की जाती है, सियासत की कुछ पेचीदगियां तो बेहद खामोशी से धुप्प अंधेरे में एक दूसरे से मुलाकात के बाद भी सुलझायी जाती है. जब राजनीति के दो परस्पर विरोधी आपस में मिल बैठ कर चाय की चुस्की का आनन्द लेते हैं, तो चाय के प्याले के साथ सिर्फ ठंड के बढ़ते प्रकोप और मौसम के कहर पर चर्चा ही नहीं होती, यही वही मुलाकात होती है, जब आने वाले सियासी भूचाल की पटकथा लिखी जाती है. बिहार की सियासत में भी कुछ इसी प्रकार की एक पटकथा लिखे जाने की खबर पिछले कुछ दिनों से सियासी फिजाओं में तैर रही है. एक ऐसी पटकथा जो आज तो अखबारों की सुर्खियों से गायब है, या गायब कर दिया गया है, लेकिन कल यही मुलाकात बिहार की पूरी राजनीति को बदलने वाली अहम कड़ी साबित हो सकती है.

    बिहार के सियासी गलियारों की ब्रेकिंग न्यूज

    दरअसल इस सियासी रहस्य को ज्यादा उलझाने के बजाय हम सीधे उस मजमून पर आते हैं, जिसके बारे में दावा है कि चंद दिन पहले इसकी दास्तान दिल्ली के आसमान पर उमड़ते कोहरे के बीच आधी रात में सर्द हवाओं के बीच लिखी गयी थी, दरअसल बिहार में एनडीए गठबंधन के बीच सीटों को लेकर जारी रस्साकस्सी, और अपनी अपनी शर्तों पर अड़े रहने की खबरों के बीच, खबर यह है कि लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने आधी रात को राजद कोटे से राज्य सभा सांसद प्रोफेसर मनोज झा से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की है. जैसे ही यह खबर मीडिया के हाथ लगी, दिल्ली से चलकर यह बिहार के सियासी गलियारों की ब्रेकिंग न्यूज बन गयी, इस मुलाकात के सियासी निहितार्थ निकाले जाने लगे, यह दावा किया जाने लगा कि भले ही राजधानी पटना में हर दिन सीएम नीतीश कुमार के पलटी मारने की खबरों को परोसा जाता है, कुछ हद तक इसे ब्रेकिंग न्यूज की शक्ल में परोस कर प्रायोजित तरीके से महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है, का संदेश लोगों तक पहुंचाने की सियासत की जाती है, लेकिन अब एक सियासी पलटी की खबर दिल्ली से निकलते हुए बिहार की सियासत तपिश को बढ़ा रही है.

    भाजपा में डूबता नजर आ रहा है चिराग का चिराग

    यहां बता दें कि भले ही एनडीए में सब कुछ ठीक होने का दावा किया जाता हो, लेकिन अंदर खाने वहां भी बेचैनी तेज है, और यही कारण है कि उपेन्द्र कुशवाहा से लेकर जीतन राम मांझी और चिराग पासवान को आपस में बैठक करनी पड़ रही है, साफ है कि उनकी सीटों की संख्या को लेकर भाजपा की चुप्पी इन तीनों को बेचैन कर रही है, खास कर चिराग पासवान और  जीतन राम मांझी ने सीएम नीतीश के खिलाफ जिस तरीके से मोर्चा खोला है, उसके बाद इन दोंनों के बाद सियासी विकल्प भी बेहद सीमित है, और यह माना जाता है कि सीएम नीतीश के दरवाजे इनके लिए बंद हो चुके हैं, खबर यह भी है कि जीतन राम मांझी को साफ कर दिया गया है  कि उन्हे लोक सभा की कोई भी सीट नहीं मिलने वाली है, हां, यदि वह अपनी सियासी कुर्बानी देते हैं, तो आगे चलकर संतोष सुमन के लिए राज्यसभा  तो जीतन राम मांझी के लिए किसी राज्य का गवर्नर का बनने की गुंजाइश बरकरार है, लेकिन सियासत में भविष्य मे क्या होता है, कोई भी नहीं जानता, इसी चाहत में तो अखिलेश का साथ छोड़कर राजभर एक बार फिर से भाजपा के साथ गयें थें, लेकिन आज तक उन्हे मंत्री का पद नहीं मिला, और आज वह पेंडुलम की भांति यूपी की सियासत में डोल रहे हैं, और यही चिंता जीतन राम मांझी को परेशान कर रही है, दूसरी तरह चिराग पासवान को किसी भी कीमत पर भाजपा छह से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं है, और इसी छह सीटों में से उन्हे अपने चाचा पशुपति पारस और प्रिन्स पासवान के सीटों को भी एडजस्ट करना है, इस प्रकार चिराग का चिराग भी भाजपा में डूबता नजर आ रहा है.

    क्या है इस मुलाकात के मायने

    अब इस सियासी परिदृश्य में इस मुलाकात के मायने क्या है, क्या चिराग को अब भाजपा में भाजपा के अंदर अपना सियासी भविष्य डूबता नजर आ रहा है, और इसी सियासी भविष्य को एक नई राह देने की कोशिश में चिराग आधी रात को प्रोफसर साहब के क्लास ले रहे हैं, प्रोफसर साहब का उपदेश क्या चिराग के सियासी भविष्य उजाला प्रदान कर सकेगा, यह तो चिराग ही जाने, लेकिन इतना तय है कि चिराग और नीतीश के बीच रिश्ते में चाहे जितनी तल्खी हो, लेकिन चाचा लालू का प्रेम आज भी चिराग पर बनी हुई है, आज भी मीसा भारती से लेकर तेजस्वी के दिल में चिराग के प्रति एक हमदर्दी तो जरुर है, तो क्या राजद अपने कोटे से चिराग को कुछ सीटे प्रदान करने जा रही है, या फिर 2024 के महासंग्राम के पहले किसी और भी सियासी प्लॉट की पटकथा लिखी जा रही है, या फिर किसी भी हालत में चिराग को हाजीपुर सीट से लोकसभा पहुंचने का रास्ता साफ किया जा रहा है. ताकि संकट के समय चिराग चाचा लालू के लिए मददगार साबित हो सकें, यहां ध्यान रहे कि तमाम सियासी दुश्मनी के बीच भी लालू यादव ने रामविलास पासवान को राज्यसभा भेजकर अपनी उदारता का परिचय दिया था, तो इस बार भी अपने भतीजे के लिए कुछ ऐसा कर जायें तो यह अचरज नहीं होगा.

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