इधर चला, मैं उधर चला, जाने कहां मैं किधर चला, कुछ इसी अंदाज में पाला बदलते हैं चाचा नीतीश! जनविश्वास रैली से तेजस्वी की हुंकार, 2024 में जदयू खत्म

    इधर चला, मैं उधर चला, जाने कहां मैं किधर चला, कुछ इसी अंदाज में पाला बदलते हैं चाचा नीतीश! जनविश्वास रैली से तेजस्वी की हुंकार, 2024 में जदयू खत्म

    Patna-जन विश्वास रैली की भारी भीड़ के बीच तेजस्वी यादव ने लोकसभा चुनाव का एजेंडा तय कर दिया है. चाचा नीतीश का 17 साल की सरकार के साथ अपने 17 महीने की सरकार की तुलना करते हुए तेजस्वी ने कहा कि इस 17 महीनों में हमने अपने एक-एक वादे को पूरा कर दिखलाया. शिक्षा मित्र से लेकर आंगनवाड़ी सेविकाओं और टोला सेवकों के मानदेय में वृद्दि करवाया. इस गांधी मैदान में पहले सिर्फ राजनीतिक रैलियां होती थी, यह हमारी सरकार थी, जिसने दो लाख युवाओं को एक साथ सरकारी नौकरियों का सौगात दिया. हमने 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया था और महज इस 17 महीनों के कार्यकाल में ही हमने अपने सारे वादे को पूरा कर दिखलाया. और सिर्फ नौकरियां ही नहीं दिया, पहली बार जातीय जनगणना करवाकर पिछड़ों और अति पिछड़ों की सामाजिक भागीदारी का रास्ता भी साफ किया. पिछड़ों का आरक्षण विस्तार किया.

    चाचा कहते थें कि 10 लाख नौकरियों के लिए पैसा कहां से आयेगा?

    नीतीश कुमार के पुराने बयान की याद दिलाते हुए तेजस्वी ने कहा कि उनके चाचा कहते थें कि दस लाख नौकरियों के लिए पैसा कहां से आयेगा, क्या अपने बाप के घर से लायेगा, लेकिन हमारी सरकार ने पैसा भी लाया और युवाओं को नौकरियां भी दिया. ऋतिक रोशन का एक डॉयलाग को दुहराते हुए तेजस्वी ने कहा कि इधर चला, मैं उधर चला, जाने कहां मैं किधर चला, अरे, अरे मैं फिसल गया, कुछ इसी अंदाज में हमारे चाचा इधर उधर फिसलते रहते हैं. लेकिन हमने बिहार की जनता से जो वादा किया था, उसे एक ही झटके में पूरा किया, क्योंकि हमारे लिए कुर्सी नहीं गांव गरीब, दलित पिछड़ों और अल्पसंख्यक समाज की सेवा करना ज्यादा जरुरी है, और यही कारण है कि जैसी हमारी हाथ में सत्ता आयी, हमने सरकारी नौकरियों का मुंह खोल दिया. और हालत यह है कि हमारे उस काम को अपने नाम करने के लिए चाचा नीतीश को पोस्टर लगानी पड़ रही है, बड़े बड़े इस्तहार लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन लोग उनके उस बयान को भूले नहीं है, जिसमें उन्होंने हमारा तंज उड़ाते हुए कहा था कि 10 लाख नौकरी बांटेगा तो पैसा क्या अपने बाप से लायेगा, लेकिन हमने पैसा भी लाया और नौकरी भी दिया.

    आरजेडी का मतलब

    राजद पर यादव और मुस्लिम की पार्टी होने के आरोपों पर पलटवार करते हुए तेजस्वी ने कहा कि R For Right, J for job or D for development, यही हमारा संकल्प है, और यही हमारी पहचान है. भाजपा चाहे जितना भी प्रलाप करे, लेकिन राजद माई के साथ ही बाप की पार्टी भी है. बाप मतलब बहुजन, आधी आबादी, अल्पसंख्यक दलित, पिछड़ा और आदिवासी. तेजस्वी ने कहा कि पीएम मोदी बोलते हैं कि तेजस्वी अपने पिता को याद क्यों नहीं करता है, तो पीएम मोदी को याद होना चाहिए कि यह लालू यादव ही थें जिसने बिहार को रेल फैक्ट्री दिया, रेलवे को मुनाफा में लाया, पीएम मोदी बताये कि अपने दस वर्षों के शासन काल में उन्होंने बिहार को क्या दिया, कौन सी फैक्ट्री दी.

    पुराने अंदाज में दिखे लालू

    आज लालू यादव भी अपने फार्म में लौटते दिखे, अपने संक्षिप्त लेकिन चुटकले अंदाज में लालू यादव ने पीएम मोदी की दुखती रग पर हाथ रखने की कोशिश. प्रधान मंत्री मोदी को गैर हिन्दू होने का तमगा देते हुए लालू यादव ने कहा कि भला कौन हिन्दू होगा, जो अपनी मां की मृत्यू के बाद भी बाल दाढ़ी नहीं मुंडवाता हो. यह तो हिन्दू है नहीं, इसे तो सिर्फ धर्म के नाम पर हिन्दूओं का वोट बटोरना है. परिवारवाद का जवाब देते हुए लालू ने कहा कि जिसके पास परिवार होगा, वही तो परिवार का दर्द भी समझेगा, जिसका कोई परिवार ही नहीं है, उसे भला परिवार और उस परिवार के सामने खड़ी मंहगाई की फिक्र क्या होगी. एक परिवारवाला ही जनता का दुख, तकलीफ, महंगाई और बेरोजगारी का दर्द समझ सकता है.

    पटना की सड़कों पर भारी जनसैलाब

    यहां याद रहे कि तेजस्वी की जनविश्वास रैली में आज पटना की सड़कों पर एक जनसैलाब उमड़ता दिख रहा है, जानकारों का दावा है कि यह भीड़ राजधानी पटना के पिछले 17 वर्षों का रिकार्ड को ध्वस्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर बढ़ती नजर  आ रही है. पूरा पटना लाल हरे झंडे से पट्टा है, कोई भी ऐसी सड़क नहीं है, जहां जनसैलाब का समुन्द्र उमड़ता नहीं दिख रहा हो. सारी भीड़ एक साथ गांधी मैदान की ओर बढ़ती नजर आ रही है, इस बीच तेजस्वी यादव भी अपने पिता लालू यादव के साथ रथ पर सवार होकर मंच पर पहुंच चुके हैं. मंच पर मीसा भारती और रोहिणी आचार्या भी मौजूद है. भारी भीड़ को इंडिया गठबंधन का मतलब समझाते हुए तेजप्रताप यादव ने कहा कि ‘इंडिया’ का मतलब रोजगार, रोजी रोटी की व्यवस्था और सरकारी नौकरी की गारंटी.

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