‘विश्व वैशाली फेस्टिवल और प्रजातंत्र’ से हेमंत विश्व शर्मा ने सीखा पाठ! इंडिया गठबंधन के नेताओं को चांद पर भेजने का किया एलान  

    ‘विश्व वैशाली फेस्टिवल और प्रजातंत्र’ से हेमंत विश्व शर्मा ने सीखा पाठ! इंडिया गठबंधन के नेताओं को चांद पर भेजने का किया एलान  

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK) जैसे जैसे इंडिया गठबंधन की गतिविधियां तेज होती जा रही है, भाजपा की बेचैनी उतनी ही तेजी से बढ़ती नजर आ रही है, बेचैनी का आलम यह है कि गठबंधन का एलान होते ही इंडिया शब्द मात्र से दूरी बनाने की कवायद शुरु हो गयी और भारत के इतिहास में पहली बार ‘प्रेसिडेंट ऑफ भारत’ की शब्दावली सामने आयी. राजनीतिक खीझ में इंडिया शब्द को मिटाने के दावे किये जाने लगे.

    लेकिन अब बात उससे भी आगे निकलती नजर आने लगी है. इसे राजनीतिक हताशा या बेचैनी कहें कि भाजपा नेता और आसाम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा ने इस बात का दावा कर दिया कि इंडिया जैसा कोई शब्द नहीं होता, और तो और वह इंडिया गठबंधन के नेताओं को चांद पर भेजने की बात कर रहे हैं, और इसके लिए इसरो का मदद लेने की बात कही जा रही है. हिमन्त बिश्व शर्मा ने कहा कि वह इसरो से एक ऐसा संयत्र बनाने का आग्रह करेंगे, जिसमें बैठाकर इंडिया गठबंधन के नेताओं को चांद पर भेजा जा सकें, ताकि इस धरती को भार से मुक्त किया जा सके.

    वैशाली की धरती से विरोधियों को चांद पर भेजने की सीख

    मजे की बात यह है कि हेमंत विश्व शर्मा विश्व वैशाली फेस्टिवल और डेमोक्रेसी के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बिहार पहुंचे थें. यह वैशाली और बिहार की ही धरती है जिसने पहली बार पूरी दुनिया को प्रजातंत्र का फलसफा दिया था, इसी वैशाली की धरती से प्रजातंत्र का बीजारोपण हुआ था, इसी वैशाली की धरती पर हेमंत विश्व शर्मा प्रजातंत्र का फलसफा सीखने पहुंचे थें, लेकिन इस विश्व वैशाली फेस्टिवल और प्रजातंत्र हेमंत विश्व शर्मा के क्या सीख हासिल किया वह उनके इस बयान के समझा जा सकता है, वैशाली की धरती से अपने विरोधियों को चांद पर भेजने का एलान कर हेमंत विश्व शर्मा ने साफ कर दिया कि अभी देश का मिजाज लोकतंत्र के अनुकूल नहीं है.

    वैसे जैसे ही यह बयान आया राजनीतिक पलटवार की भी शुरुआत हो गयी, विरोधी दलों ने हेमंत विश्व शर्मा को निशाने पर लेने में देरी नहीं की, कांग्रेस ने इसकी शुरुआत करते हुए कहा कि पिछले नौ वर्षो में भाजपा ने एक सुई की फैक्ट्री तो लगाई नहीं, हम विरोधियों को चांद पर भेजने के लिए भी इन्हे उस इसरो से गुहार लगानी पड़ रही है, जिसे देश के पहले सीएम और लोकतंत्र के पहरुआ नेहरु ने बनाया था, यदि नेहरु ने इसरो की स्थापना नहीं की होती तो पता नहीं आज हेमंत विश्व शर्मा और दूसरे भाजपाई हम विपक्षी दलों को चांद पर भेजने का कौन सा जुगाड़ लगाते और लगा पाते भी या नहीं.   


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