क्या अब ऑनलाइन टेंडर मैनेजमेंट के खेल का पर्दाफाश करेगी ईडी! देखिये अभियंता वीरेन्द्र राम कैसे फोड़ रहा है रोज एक नया बम

    क्या अब ऑनलाइन टेंडर मैनेजमेंट के खेल का पर्दाफाश करेगी ईडी! देखिये अभियंता वीरेन्द्र राम कैसे फोड़ रहा है रोज एक नया बम

    रांची(RANCHI): ईडी के शिंकजे में कैद अभियंता वीरेन्द्र राम रोज नये-नये बम फोड़ रहा है, ईडी के अधिकारियों के सामने उसने अब तक ऐसे 14 नेताओं और 6 अधिकारियों के नामों का खुलासा किया है, जिनकी कृपा से उसने अपना काला साम्राज्य खड़ा किया था.

    ऑनलाइन टेंडर मैनेजमेंट के इस खेल में आला अधिकारियों और राजनेताओं की भी सहभागिता का आरोप

    हालांकि ईडी की कोशिश उससे ऑनलाइन टेंडर मैनेजमेंट का उस राज को उगलाने की है, जिसमें लाखों का वारा न्यारा होता था, करोड़ों की राशि अधिकारियों से होते हुए चुनिंदा नेताओं तक पहुंचाई जाती थी और इसके बदले में वीरेन्द्र राम को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहता था.

     एसीबी द्वारा पीई की मांग पर निगरानी मंत्रीमंडल विभाग कुंडली मार कर बैठ गया

    राजनीतिक संरक्षण का यह आरोप इसलिए मजबूत होता दिख रहा है, क्योंकि दावा किया जा रहा है कि एसीबी ने वीरेन्द्र राम के खिलाफ पीई दर्ज करने के लिए निगरानी मंत्रीमंडल विभाग को एक गोपनीय रिपोर्ट भेज कर अनुमति की मांग की थी, लेकिन निगरानी मंत्रीमंडल विभाग इस गोपनीय रिपोर्ट पर कुंडली मार कर बैठ गया और इधर वीरेन्द्र राम को एक-एक नयी जिम्मेवारियां दी जाती रही है.

     शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने फोन पर इंजीनिरिंग सेल के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार संभालने का आदेश दिया

    ताजा मामले में उसने यह खुलासा किया है कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने उससे फोन पर झारखंड शिक्षा परियोजना के इंजीनिरिंग सेल के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार संभालने का आदेश दिया था. हालांकि उसने यह पद भार ग्रहण नहीं किया और ना ही इसके लिए कोई औपचारिक आदेश निकाला गया. यहां यह भी बता दें कि इसके पहले यह जानकारी भी आयी थी कि मंत्री आलमगीर आलम ने भी डीआईजी को पत्र लिख कर वीरेन्द्र राम को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था.   

    वीरेन्द्र राम इस पूरे खेल का महज एक मोहरा है

    ताजा मामले में उसने यह खुलासा किया है कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने उससे फोन पर झारखंड शिक्षा परियोजना के इंजीनिरिंग सेल के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार संभालने का आदेश दिया था. हालांकि उसने यह पद भार ग्रहण नहीं किया और ना ही इसके लिए कोई औपचारिक आदेश निकाला गया. यहां यह भी बता दें कि इसके पहले यह जानकारी भी आयी थी कि मंत्री आलमगीर आलम ने भी डीआईजी को पत्र लिख कर वीरेन्द्र राम को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था. यदि आप इन सभी कड़ियों को आपस में मिलाकर समझने की थोड़ी भी कोशिश करें तो इस पूरे खेल को समझना इतना दुस्कर भी नहीं है, साथ ही यह साफ है कि वीरेन्द्र राम इस पूरे खेल का महज एक मोहरा है, अभी इसके असली किरदार सामने आने बाकी है.  

     


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