ये कैसा मज़ाक चल रहा है? पेश है डॉग जी के बाद नीतीश कुमार का आवासीय प्रमाणपत्र का आवेदन, FIR दर्ज

    ये कैसा मज़ाक चल रहा है? पेश है डॉग जी के बाद नीतीश कुमार का आवासीय प्रमाणपत्र का आवेदन, FIR दर्ज

    पटना(PATNA):बिहार में एक बार फिर सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग का चौंकाने वाला मामला सामने आया है.इस बार यह मामला सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर से जुड़ा है. मुज़फ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड में मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ आवासीय प्रमाणपत्र बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया गया, जिसे देखते ही राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया. मामले में संबंधित राजस्व कर्मचारी ने सरैया थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है और इसे मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल करने की साजिश बताया है.

     पेश है डॉग जी के बाद नीतीश कुमार का आवासीय प्रमाणपत्र का आवेदन

    सरैया प्रखंड के राजस्व कर्मचारी अभिषेक सिंह ने पुलिस को दिए गए अपने आवेदन में बताया कि दिनांक 27-07-2025 को वे ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त आवासीय प्रमाणपत्र के आवेदनों की जाँच कर रहे थे. इस दौरान एक अजीबो-गरीब आवेदन सामने आया, जिसमे आवेदक का नाम नीतीश कुमारी, पिता का नाम लखन पासवान, माता का नाम लाखिया देवी, और पता नगर पंचायत सरैया, जिला मुज़फ्फरपुर दर्ज था लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि आवेदन संख्या BRCC0/2025/16940816 में लगे फोटो में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर लगी थी.

    पढे राजस्व कर्मचारी ने क्या कहा

    राजस्व कर्मचारी ने इसे जानबूझकर किया गया एक शरारतपूर्ण कृत्य बताया और कहा कि यह मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुँचाने और विभागीय प्रक्रिया को भ्रमित करने के उद्देश्य से किया गया है. उन्होंने पुलिस से अज्ञात आवेदक की पहचान कर उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की.

    प्राथमिकी दर्ज, पुलिस कर रही जांच

    इस गंभीर मामले में सरैया थाना में केस संख्या 387/25 दर्ज किया गया है.पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 229, 233 और 356(1) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. फिलहाल आरोपी अज्ञात है, लेकिन पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आवेदनकर्ता की पहचान में जुटी हुई है.

    इससे पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

    गौरतलब है कि बिहार में इससे पहले भी कुत्ते (डॉग जी) और एक फिल्म अभिनेत्री की तस्वीरों के साथ आवासीय या जाति प्रमाणपत्र के आवेदन सामने आ चुके है.ये घटनाएं ई-गवर्नेंस और डिजिटल प्रक्रिया की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है.


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