किसकी होगी ताजपोशी! मोकामा की सीट पर आमने सामने दो "बाहुबली मैडम"

    किसकी होगी ताजपोशी! मोकामा की सीट पर आमने सामने दो "बाहुबली मैडम"

    मोकामा(MOKAMA): बिहार में बदले राजनीतिक समीकरण के बीच दो सीटों पर उपचुनाव होने हैं. आगामी 3 नवम्बर को बिहार के गोपालगंज और मोकामा विधानसभा सीट पर मतदान होगा और 6 नवम्बर को नतीजे आएंगे. अगर देखा जाये तो नये गठबंधन के लिए ये दोनों सीटों पर होने वाला उपचुनाव लिटमस टेस्ट की तरह होगा. बीजेपी ने जहाँ दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं तो महागठबंधन की तरफ से दोनों सीटों पर आरजेडी ने अपने उम्मीदवार दिए हैं. लेकिन दोनों सीटों में मोकामा की सीट पर सबकी नजरें टिकी है. इस बार मोकामा की सीट से दो मैडम बाहुबली आमने सामने है.

    गोपालगंज सीट पर बीजेपी ने दिवंगत विधायक सुभाष सिंह की पत्नी कुसुम देवी को अपना उम्मीदवार बनाया है तो आरजेडी ने यहाँ से मोहन प्रसाद गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है. जबकि सबकी नजरें जिस सीट पर लगी है वो है मोकामा विधानसभा की सीट. जहाँ से आरजेडी ने निवर्तमान विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि बीजेपी ने भी इस बार अपना उम्मीदवार एक बाहुबली की पत्नी को दिया है. जेडीयू नेता रहे इलाके के बाहुबली ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को इस बार बीजेपी ने मोकामा से टिकट दिया है. ललन सिंह जेडीयू से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए और उनकी पत्नी को टिकट दिया गया. दोनों मैडम बाहुबली के जीत के अपने अपने दावे हैं. हालांकि अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को जहाँ अनंत सिंह पर भरोसा है तो सोनम देवी कहती है. अगर सामने बाहुबली है तो वो बजरंगबली है. सामने आई बाधा को पार करना जानती है.

    मोकामा की सीट नहीं सिर्फ महागठबंधन के लिए बल्कि अनंत सिंह के लिए भी प्रतिष्ठा की सीट है. अनंत सिंह इस विधानसभा से पांच बार जीत हासिल कर चुके हैं. चाहे किसी दल में रहे या निर्दलीय रहे. जीत अनंत सिंह की हुई. मंगलवार को महागठबंधन ने नीलम देवी को अपना उम्मीदवार घोषित किया. लेकिन नीलम देवी इससे पहले ही मैदान मे उतार चुकी थी. हालांकि यह भी सच है की अनंत सिंह के खिलाफ पहली बार मजबूत उम्मीदवार खड़ा हुआ है लेकिन अनंत सिंह निश्चिंत है की जीत तो उनकी हो होंगी. कोर्ट मे पेशी को आये अनंत सिंह से जब पूछा गया की इस बार मुकाबला कड़ा है तो उनका जवाब था. सामने वाला बरसाती मैढ़क है. ज़मानत भी नहीं बचेगा.

    मोकामा, जिसकी पहचान टाल से है और, टाल की मिट्टी सी फितरत है मोकामा की. जैसे टाल की काली मिट्टी पर पानी की दो बूंद पड़ जाए तो वह शरीर से चिपक जाती है और अगर धूप में सूख जाए तो वही मिट्टी ईंट सरीखा सख्त हो जाती है. मोकामा के लोग भी ऐसे ही हैं.  अगर साथ दिया तो बाहुबली अनंत सिंह को हर परिस्थिति में जिताया और रुष्ट हुए तो किसी की नहीं सुनी. 1952 में बना मोकामा विधानसभा सीट शुरू से ही सामान्य सीट रही है. जातिगत आंकड़ों के अनुसार भूमिहार बहुल क्षेत्र है. लेकिन पिछले तीन दशक से यहां लगातार बाहुबली जीतते आए हैं.  सूरजभान सिंह और अनंत सिंह जैसे बाहुबली यहां प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. हालांकि इस बार के चुनाव में मोकामा की फिजां बदली हुई है. 


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