आज हर कोई बोल रहा काश हमारे साहब भी ऐसे होते ! कभी मजदूरों के साथ कॉफी पर चर्चा तो अब गरीब का घर बनाने खुद कुदाल लेकर पहुंचे SDM

    आज हर कोई बोल रहा काश हमारे साहब भी ऐसे होते ! कभी मजदूरों के साथ कॉफी पर चर्चा तो अब गरीब का घर बनाने खुद कुदाल लेकर पहुंचे SDM

    रांची(RANCHI): झारखंड में बड़े साहब यानि BDO-SDO की तस्वीर हर दिन सोशल मीडिया पर सामने आती है. कई तस्वीर ऐसी रहती है जो इतिहास लिख देती है. क्योंकि शायद किसी ने सोचा नहीं होगा की आज के दौर में भी ऐसे अधिकारी झारखंड में है. जो बेबस लाचार लोगों का दर्द समझते है. तभी तो SDM हाथ में कुदाल लेकर एक मुसहर परिवार के घर निर्माण का काम शुरू करने खुद पहुंच गए. और हां SDO साहब कॉफी पर चर्चा भी करते है. लेकिन इस चर्चा की तस्वीर थोड़ी अलग दिखती है.  बड़े लोगों से ज्यादा क्षेत्र के गरीब मजदूर के साथ कॉफी  पर बात करते है. जिससे अधिकारी और जनता के बीच की दूरी मीट सके.        

    SDM ने शेयर की तस्वीर

    यह अधिकारी कोई और नहीं बल्कि गढ़वा SDM संजय पांडे है. गढ़वा में जब से पोस्टिंग मिली यहा के ग्रामीण खुश है. क्योंकि बड़े साहब होने के बावजूद इन्हें गुरूर नहीं है. बड़े ही शालीनता के साथ सभी से मिलते है. सभी की समस्या को जानते है और फिर उसे दूर करने की पहल करते है. अब एक वीडियो सामने आया है. SDM संजय पांडे ने इसे खुद शेयर किया है. जिसमें उन्होंने बताया कि राम स्वरूप मुसहर बास की बल्ली और पुराने कपड़े से बनी झोपड़ी में रहते थे. जब इसकी जानकारी उन्हे मिली तो उन्होंने उनके घर का निर्माण शुरू कराया.

    कुदाल चला कर खुद शुरू कराया काम

     

    जब सारी प्रक्रिया पूरी हो गई तब खुद वह पहुंचे और हाथ में कुदाल लिए हुए दिखे. इसके बाद कुदाल चला कर एक मकान की नींव रखी. खुद SDM ने क्या कुछ लिखा वह खुद आप पढिए  “नीली लुंगी पहने खड़े 60 वर्षीय रामस्वरूप मुसहर बांस की बल्ली और पुराने कपड़ों से बनी अस्थायी झोपड़ी में रह रहे थे, बरसात होने पर आसपास के खंडहर घरों या सरकारी भवनों के बरामदा में बाल बच्चों सहित छिप जाते थे. बचपन से लेकर ऐसे ही खानाबदोश आशियाने में परिवार सहित रह रहे थे. पर अब इनका पक्का मकान होगा.  इनके प्रस्तावित आवास की नींव की आज शुरुआत की. उनका मुंह मीठा भी करवाया गया.

     

    SDM की चाय भी है पूरे चर्चा में

    यह तो हो गई आवास की बात इसके अलावा SDM संजय पांडे अपने दफ्तर में एक सप्ताह अलग अलग सेक्टर के पिछड़े लोगों को बुलाते है फिर उनके साथ चाय पर चर्चा करते है. कभी किन्नर समाज को आमंत्रित करते है तो कभी ठेले रिक्शा चलाने वाले को. सभी के साथ एक साथी बन कर खूब बाते करते है. इससे उनकी समस्या को भी जानने की कोशिश करते है.       

     

     

     

     

     

     

     

     


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