सियासत का सबसे दगाबाज चेहरा! पालाबदल पर झामुमो की प्रतिक्रिया, ऐसा कोई सगा नहीं जिसे नीतीश ने ठगा नहीं, संयोजक नहीं बनाने की असली वजह यही तो नहीं!

    सियासत का सबसे दगाबाज चेहरा! पालाबदल पर झामुमो की प्रतिक्रिया, ऐसा कोई सगा नहीं जिसे नीतीश ने ठगा नहीं, संयोजक  नहीं बनाने की असली वजह यही तो नहीं!

    Ranchi-हालांकि अभी तक औपचारिक रुप से सीएम नीतीश ने अपने पाला बदल की घोषणा नहीं की है, लेकिन जो खबरें आ रही है, उसके हिसाब से वह देर रात तक अपने इस्तीफे की घोषणा कर भाजपा के साथ जाने का औपचारिक एलान कर सकते हैं, लेकिन इस बीच इंडिया गठबंधन के उनके पुराने सहयोगियों की ओर से उन पर निशाना साधने की शुरुआत हो चुकी है, और इसकी पहली शुरुआत उसी झारखंड से हुई है, जहां से उनके देश व्यापी दौरे की शुरुआत मानी जा रही थी. रामगढ़ में तो रैली का एलान भी कर दिया गया था, इसके साथ ही यह दावा भी किया गया था कि इंडिया गठबंधन की ओर से झारखंड में जदयू कम से कम एक सीट दी जायेगी. लेकिन अब उसी झारखंड से सीएम नीतीश को सियासत का सबसे दगाबाज चेहरा बताया जा रहा है. और इस बात का दावा किया जा रहा है कि उनकी यह अविश्वसनीयता ही मुख्य वजह थी कि उन्हे इंडिया गठबंधन का चेहरा नहीं बनाया गया था, क्योंकि हर किसी के दिल में यह अंदेशा मौजूद था कि अब तक का इनका जो इतिहास रहा है, वह भरोसे के लाइक नहीं रहा है, यहां जहां भी रहे हैं, अविश्वसनीय रहे हैं, सियासत की दुनिया में ऐसा कोई सगा नहीं है, जिसे नीतीश ने ठगा नहीं है, अपनी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सीएम नीतीश ने इंडिया गठबंधन के अपने साथियों को ठगने का उपक्रम तैयार किया था, लेकिन उनकी पुरानी कहानियां इतनी प्रचलित है, कि हर कोई उनसे आशंकित था, और कोई भी उनके चेहरे पर आगे बढ़ने को तैयार नहीं था, जब उन्होंने देखा कि यहां उनकी दाल नहीं गलने वाली है, तो उन्होंने किनारा करने का फैसला ले लिया.

    कोई पलटूराम कहता हो तो कुर्सी कुमार- झामुमो

    दरअसल यह सारे आरोप झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के हैं, सुप्रियो ने कहा कि हर कोई जानता है कि नीतीश के अनेकों नाम हैं, कोई उन्हे पलूटराम कहता है, तो कोई कुर्सी कुमार. अब नीतीश कुमार ने एक और पलटी मार कर यह साबित कर दिया कि ये सारे नामांकरण उन पर पूरी तरह से फीट बैठते हैं. इसके साथ ही सुप्रियो ने यह दावा भी किया कि बिहार में जदयू को इंट्री नहीं मिलने वाली है, झारखंड तो छोड़ दीजिये ये तो बिहार में भी जीरो पर आउट होने जा रहे हैं. 2025 के विधान सभा चुनाव के बाद इन्हे कोई पूछने वाला नहीं मिलेगा. यह उनकी जिंदगी की अंतिम पलटी है, इसके बाद वह पलटने की स्थिति में ही नहीं होंगे.

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