‘मित्रकाल’ के विरुद्ध लोकतंत्र बचाने की लड़ाई, जमानत मिलते ही राहुल गांधी ने फिर से साधा निशाना, देखिये यह रिपोर्ट

    ‘मित्रकाल’ के विरुद्ध लोकतंत्र बचाने की लड़ाई, जमानत मिलते ही राहुल गांधी ने फिर से साधा निशाना, देखिये यह रिपोर्ट

    रांची- सूरत सेशन कोर्ट से जमानत मिलते ही राहुल गांधी ने सरकार पर एक और निशाना साधा है. अपने ट्विटर एकाउंट राहुल गांधी ने लिखा है कि ‘मित्रकाल’ के विरुद्ध यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है, इस संघर्ष में सत्य मेरा अस्त्र है और सत्य ही मेरा आसरा.

    सूरमा नहीं विचलित होते

    जबकि प्रियंका गांधी ने लिखा ‘सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोतें, विध्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं’.

    मोदी सरनेम को लेकर की गयी टिप्पणी के बाद दर्ज हुआ था मामला

    सनद रहे कि एक चुनावी सभा के दौरान मोदी सरनेम को लेकर की गई एक टिप्पणी के मामले में सूरत की निचली अदालत के द्वारा उन्हे दो वर्ष की सजा सुनायी गयी थी, कोर्ट के फैसले के महज 24 घंटों के अन्दर-अन्दर लोकसभा कार्यालय के द्वारा उनकी सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना भी जारी कर दी गयी थी, इसके साथ ही उनका सरकारी बंगला को भी खाली करने का फरमान सुना दिया गया था.

    कोर्ट ने तीस दिनों का समय दिया था

    हालांकि सूरत कोर्ट ने उन्हे इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिनों की मोहलत दी थी. लेकिन जिस प्रकार कोर्ट के फैसले के महज 24 घंटों के अन्दर-अन्दर लोकसभा कार्यालय के द्वारा सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी की गयी  और जिस प्रकार आनन-फानन में सरकारी बंगला को खाली करने का आदेश सुनाया गया, उससे कई सवाल खड़े होने लगे थें.

    राहुल गांधी के पक्ष में सहानुभुति की लहर

    इसके साथ ही पूरे देश में राहुल गांधी के पक्ष में सहानुभुति की लहर देखी जा रही थी, आम धारण यह बनने लगी कि पीएम मोदी को लेकर राहुल गांधी के सवालों से भाजपा के अन्दर बेचैनी है, वह किसी भी प्रकार राहुल गांधी को संसद से बाहर करना चाहती है, अडाणी प्रकरण और मोदी अडाणी की यारी का जो सवाल राहुल गांधी के द्वारा लगातार उछाला जा रहा है, भाजपा उससे किसी भी कीमत पर मुक्ति चाहती है. साफ है कि अब जब राहुल गांधी को इस मामले में जमानत मिल गयी है. लेकिन जमानत मिलने की इस खबर से राहुल गांधी से ज्यादा आज भाजपा राहत महसूस कर रही होगी. क्योंकि जमानत मिलने के बाद बहुत संभव है कि राहुल गांधी के पक्ष में उमड़ता जनमत एक बार फिर से शांत पड़ेगा. उसकी रफ्तार धीमी होगी.


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