बिहार के स्कूली शिक्षा का हालत खस्ताहाल, बदलाव की मुहिम में जुटे के.के पाठक को मिला विश्वविख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज का समर्थन

    बिहार के स्कूली शिक्षा का हालत खस्ताहाल, बदलाव की मुहिम में जुटे के.के पाठक को मिला विश्वविख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज  का समर्थन

    पटना(PATNA)-बिहार की स्कूली शिक्षा में आमूलचूल बदलाव की कोशिश करते नजर आ रहे शिक्षा विभाग के मुख्य अपर सचिव के.के पाठक को दुनिया के मशहूर अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज का समर्थन मिला है.

    ज्यां द्रेज ने के.के पाठक के नेतृत्व में चलाये जा रहे बदलाव के प्रयासों का भरपूर समर्थन किया, उन्होंने कहा है कि यह एक सच्चाई है कि गरीब वंचित और सामाजिक रुप से हाशिये पर खड़े सामाजिक समूहों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल ही एक मात्र सहारा है, लेकिन बिहार के स्कूलों की हालत चिंताजनक है, शिक्षकों का घोर अभाव है, जबकि तीस बच्चों पर कम से कम एक शिक्षक होना चाहिए, लेकिन कई जिलों का आकलन के बाद भी यह मापदंड पूरा होता नहीं दिखा. इस स्थिति से निकलने के लिए ना सिर्फ भारी मात्रा में शिक्षकों की बहाली करनी होगी, बल्कि बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए रणनीतियों का निर्माण भी करना होगा. आज बच्चे स्कूल आना नहीं चाहते हैं. उनके शिक्षा के प्रति अरुचि हैं, और रुचि है तो भी वह निजी विद्यालय की ओर जाना चाहते हैं, इस हालत में गरीब, वंचित और सामाजिक रुप से हाशिये पर खड़े सामाजिक समूहों के बच्चों को स्कूलों तक लाना एक चुनौती है.

    प्राइवेट ट्यूशन पर रोक का समर्थन

    ज्यां द्रेज ने के.के पाठक के उस फैसले का भी समर्थन किया जिसमें स्कूल के समय प्राइवेट ट्यूशन पर रोक लगायी गयी है. उन्होंने कहा कि सरकार को इसके साथ ही अभी और भी कई बदलाव लाने होंगे. बच्चों को लिए स्कूलों में प्रति दिन अंडे की भी शुरुआत की जा सकती है, ताकि बच्चों को ना सिर्फ पौष्टिक आहार मिले बल्कि उनमें स्कूल के प्रति रुचि भी जगे.

    वंचित वर्गों के लिए घातक होगी नई शिक्षा नीति

    नयी शिक्षा नीति पर अपनी राय रखते हुए ज्यां द्रेज ने कहा कि यह इससे स्कूली शिक्षा की स्थिति और भी खराब हो सकती है, क्योंकि इसमें छोटे-छोटे स्कूलों को विलय करने की बात की गयी है. जबकि जरुरत शिक्षकों की बहाली की है, स्कूलों में संसाधन उपलब्ध करवाने की है. विलय से तो स्थिति और भी खराब होगी.

    ध्यान रहे कि मूल रुप से बेल्जियम के निवासी ज्यां द्रेज अब भारत के नागरिक है, और लम्बे अर्से से भूख, अकाल, लैंगिक असमानता, बाल विवाह, स्वास्थ्य, शिक्षा और मनरेगा पर काम कर रहे हैं, मनरेगा का मसौदा तैयार करने में भी इनकी अहम भूमिका रही थी.


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