एसपी-डीएसपी के तबादलों पर बवाल, बाबूलाल का तंज अब प्रोमोटेड अधिकारियों के भरोसे झारखंड

    एसपी-डीएसपी के तबादलों पर बवाल, बाबूलाल का तंज अब प्रोमोटेड अधिकारियों के भरोसे झारखंड

    Ranchi- डुमरी उपचुनाव के नतीजा सामने आते ही हेमंत सरकार के द्वारा पुलिस महकमे में उलटफेर को अब निशाने पर लिया जाना लगा है, एक साथ 18 एसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारियों को तबादलें पर सवाल खड़ा किया जाने लगा है. इस प्रशासनिक उलटफेर पर सवाल खड़ा करते हुए पूर्व सीएम बाबूलाल ने अपने ट्विटर एकाउंट पर  लिखा है कि “ लगता है जेल जाने के डर से परेशान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अब राज्य के डायरेक्ट आईपीएस अफ़सरों पर भरोसा कम हो गया है. यही वजह हो सकता है कि महत्वपूर्ण ज़िलों में डायरेक्ट अफ़सरों को दरकिनार कर चुन-चुन कर राज्य सेवा से प्रोमोटेड आईपीएस अफ़सरों को पोस्ट किया गया है.  सरकार इतनी बेचैन और हड़बड़ी में है कि दो साल की अनिवार्य तैनाती के नियम को भी तार-तार कर दिया गया है. वैसे मुझे उम्मीद है कि सरकारी लठैत एवं लुटेरे की तरह काम करने वालों का हश्र देखकर ये कुछ प्रोमोटेड अफ़सर भी आगे सत्ता के इशारे पर ग़ैर क़ानूनी काम करने की गलती कर खुद के लिये संकट को निमंत्रण नहीं दें.

    सरयू राय ने भी खड़ा किया था सवाल

    ध्यान रहे कि कुछ इसी तरह का सवाल पूर्व मंत्री सरयू राय के द्वारा भी खड़ा किया गया है, सीएम हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव सुखदेव सिंह के नाम लिखे पत्र में सरयू राय ने न्यूनतम निर्धारित अवधि पूरा करने के पहले अधिकारियों के स्थानांतरण पर प्रश्न खड़ा किया है, उन्होंने लिखा है कि तबादलें की यह अधिसूचना निर्धारित नियमों की अवहेलना है. इससे  राजनीतिक हस्तक्षेप की बू आती है. अफसोस है कि राज्य सरकार अपने दायित्वों का पालन के प्रति गंभीर नहीं दिख रही है. सरकार के इस कदम से अधिकारियों को मनोबल टूटेगा और जनहित के मुद्दे प्रभावित होंगे.

     

     


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