युवाओं में विदेश में बसने का क्यों बढ़ा चलन, महज़ तीन साल में लगभग 4 लाख गए देश छोड़कर

    युवाओं में विदेश में बसने का क्यों बढ़ा चलन, महज़ तीन साल में लगभग 4 लाख गए देश छोड़कर

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): विश्व गुरु बनने की राह पर बढ़ रहे भारत में रुपये के अवमूल्यन की खबर के बीच रोटी और कफन पर जीएसटी कर लगने की चर्चा है. दूसरी ओर विदेश में भारत की बल्ले-बल्ले का जिक्र भी व्हाट्स एप पर जोर-शोर से जारी है. बात विदेश की चली है, तो ये भी बताना जरूरी है कि करीब एक करोड़ भारतीय विदेश में रहते हैं. इनमें गत सात सालों में भारत छोड़कर विदेश में बस जाने वालों की संख्या साढ़े आठ लाख तक पहुंच गई है. यह आंकड़ा 2015 से 2021 तक का है. यह सरकारी आंकड़ा है, जिसे लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय जारी किया है. जब नागरिकता कानून की इधर के सालों में बहुत तेजी से चर्चा रही, ऐसे समय अपना ही मुल्क त्यागकर दूसरे देश की नागरिकता लेने की खबर कई सवाल खड़े करती है. अब इसका जवाब तो सरकार और आर्थिक पंडित ही दे सकते हैं. इसमें भी युवाओं की संख्या सबसे अधिक है. फिलहाल इस खबर में हम जानने का प्रयास करेंगे कि किस वर्ष में विदेश जाने वालों की क्या संख्या रही है.

    अपना देश छोड़कर 120 देशों में ली नागरिका

    बसपा सांसद हाजी फजलुर रहमान के एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि भारतीय नागरिकों ने अपने निजी कारणों के सबब से भारत की नागरिकता छोड़ी है. पिछले तीन सालों में 3,92,643 लाख लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी (Indian Citizenship) है.  इसमें 2019 में 1,44,017 लाख, 2020 में 85,256 हजार और 2021 में 1,63,370 लाख लोगों की संख्या शामिल है, देश छोड़कर विदेश जाने वालों ने 120 देशों में नागरिका हासिल की है.

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    पहली पसंद अमेरिका, दूसरी ऑस्ट्रेलिया

    देश छोड़कर जो भी लोग रोजी-रोटी और सुख-सुविधा की तलाश में विदेश भाग रहे हैं. उनमें उनकी सबसे पहली पंसद अमेरिका है. 2019 में 61,683 लोग भारतीय नागरिकता छोड़कर अमेरिका में जा बसे. 2020 में यह संख्या 30,828 थी. जबकि 2021 में यह बढ़कर 71,284 तक पहुंच गई. भारतीयों की दूसरी पसंद ऑस्ट्रेलिया है. 2019 में 21,340, 2020 में 13,518 था और 2021 में कुल 23,533 भारतीय ऑस्ट्रेलिया में बसे. तीसरी पसंद कनाडा रहा. 2019 में 25,381 भारतीय, 2020 में 17,093, 2021 में कुल 21,597 भारती यों ने कनाडा की नागरिकता ग्रहण की. इस मामले में चौथे पायदान पर ब्रिटेन है. 2019 में 14,309 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़कर ब्रिटेन में अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की. 2020 में यह संख्या घटकर 6489 हो गई. लेकिन 2021 में यह फिर बढ़कर 14,637 हो गई.  इसके अलावा इटली में 12,131, न्यूजीलैंड में 8,882, सिंगापुर में 7,046, जर्मनी में 6,690, स्वीडन में 3,754 और पड़ोसी देश चीन में 1400 से अधिक और पाकिस्तान में 48 लोगों ने नागरिकता ली है.

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    करीब साढ़े 5 हजार विदेशियों ने ली भारतीय नागरिकता

    मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पिछले 5 सालों में 5220 विदेशियों ने भारत की नागरिकता ली.  इसमें सबसे अधिक संख्या पाकिस्तानियों की है. पाकिस्तान के 4552 लोग भारतीय नागरिक बने। अफगानिस्तान से 8%, बांग्लादेश से 2% लोग भारत में आकर बस गए. इधर, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि 2016 से 2020 के बीच 10 हजार से ज्यादा लोगों ने भारत की नागरिकता के लिए आवेद दिये हैं.

     

     

     


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