ना कोई स्पीच, ना फेयरवेल, फिर कैसे कह दें, ऑल इज़ वैल! क्या भाजपा में होने वाला है बड़ा खेल, धनखड़ के इस्तीफे से गरमाई सियासत

    ना कोई स्पीच, ना फेयरवेल, फिर कैसे कह दें, ऑल इज़ वैल! क्या भाजपा में होने वाला है बड़ा खेल, धनखड़ के इस्तीफे से गरमाई सियासत

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से सियासी हलचल तेज है. विपक्ष सरकार पर हमलावर है. अब इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि-‘ना कोई स्पीच, ना फेयरवेल, फिर कैसे कह दें, ऑल इज वैल”. देश के उपराष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया है, इसपर पीएमओ और भाजपा की तरफ से चुप्पी साधी गई है. जिसका साफ संकेत मिल रहा कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा राजनीतिक खेल चल रहा है.

    धनखड़ के इस्तीफे को लेकर न केवल कांग्रेस, बल्कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और तृणमूल कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं. कई नेताओं ने इसे सामान्य इस्तीफा मानने से इनकार कर दिया और कहा कि उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद को अचानक छोड़ देना कोई साधारण बात नहीं हो सकती.

    जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए दिया इस्तीफा

    जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया है. उन्होंने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में इस कारण का ज़िक्र किया है और कहा है कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है. उन्होंने चिकित्सकीय सलाह के आधार पर यह फ़ैसला लिया है. इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विधान परिषद के सभी सदस्यों, लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि उन्हें हर स्तर पर सभी का सकारात्मक सहयोग मिला.

    पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किया ट्वीट

    वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है कि, "देश के उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया, लेकिन न तो प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा से जुड़े किसी भी व्यक्ति ने अभी तक न तो उन्हें शुभकामनाएं दीं और न ही धन्यवाद दिया. यह चुप्पी इस बात की ओर इशारा करती है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है और भाजपा बेहद तनाव में है."

    गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ ने सोमवार को राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था, लेकिन अभी तक न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक रूप से कोई बयान दिया है. न तो उन्हें बधाई दी गई है और न ही उनके कार्यकाल के लिए धन्यवाद दिया गया है. राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी है कि क्या धनखड़ के अचानक जाने के पीछे कोई राजनीतिक रणनीति है, या उन्हें किसी और जिम्मेदारी की ओर बढ़ाया जा रहा है.

    उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर पीएम मोदी की पहली प्रतिक्रिया आई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनखड़ के इस्तीफे के 14 घंटे बाद सोशल मीडिया पर यह प्रतिक्रिया दी है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि- श्री जगदीप धनखड़ जी को भारत सहित कई स्मारकों में देश की सेवा करने का अवसर मिला है. मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं.

    जेएमएम ने भी जताई हैरानी

    इधर जगदीप धनखड़ की इस्तीफे पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी हैरानी जताई है. JMM सांसद महुआ माजी ने कहा, "यह सबके लिए आश्चर्यजनक है. जब वह सदन में आए थे, तो ऐसा नहीं लगा था कि उनकी तबीयत इतनी खराब है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया." महुआ माजी ने कहा, "पहले भी जब उनकी तबीयत खराब हुई थी, तो उन्होंने कुछ ही दिनों की छुट्टी ली थी और फिर वापस आ गए थे. यह सत्र भी पूरा हो सकता था. उसके बाद वह इस्तीफा दे सकते थे, लेकिन पहले दिन आकर रात में इस्तीफा दे देना और दिन भर किसी को इसकी जानकारी नहीं होने देना, इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं."


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