नगर निकाय चुनाव स्थगित, लेकिन जातीय राजनीति तेज, सबसे ज्यादा किसे होगा फायदा, जानिए

    नगर निकाय चुनाव स्थगित, लेकिन जातीय राजनीति तेज, सबसे ज्यादा किसे होगा फायदा, जानिए

    पटना(PATNA): बिहार में नगर निगम निकाय चुनाव को हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थगित कर दिया गया है. इस पर सियासत तेज हो गयी है. जहां भारतीय जनता पार्टी चुनाव स्थगित होने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहरा रहा है, वहीं जदयू भाजपा को अति पिछड़ा आरक्षण विरोधी बता रहा है.

    जाति की कहानी फिर से हुई शुरू

    नगर निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट का फैसला और उसके बाद निर्वाचन विभाग का निर्देश ऐसे समय में आया है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा विरोधी पार्टियों को एकजुट करने में लगे हैं. उनके साथ राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद भी खड़े हैं. निकाय चुनाव पार्टी आधार पर नहीं लड़ा जाना है. मगर, जाति के सवाल पर नगर निकाय चुनाव स्थगित हो गया है. यानि, जाति की कहानी फिर से शुरू हो गई है और सामने लोकसभा 2024 का चुनाव है.

    पिछड़ों के आरक्षण का समर्थन कर लालू यादव ने की राजनीति मजबूत

    लालू प्रसाद, मंडल राजनीति वाले नेता हैं. वह दौर 1990 का था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिश को लागू करने का ऐलान संसद में किया था. मंडल राजनीति का दौर लालू प्रसाद, मुलायम सिंह यादव, मायावती जैसे नेताओं के लिए राजनीति का बड़ा काल था. आरक्षण, लालू प्रसाद की राजनीति की बड़ी जीत थी. पूरे देश में पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण देने का विरोध हुआ. विश्विविद्यालयों के छात्र सड़क पर आंदोलन करने लगे. बिहार में भी खूब बवाल हुआ. लालू प्रसाद, मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं ने मंडल के पक्ष में ताकत दिखाई. अब बिहार में निकाय चुनाव के बहाने फिर से जातीय उभार दिख रहा है.

    बीजेपी भी समझने लगी है जातीय राजनीति

    इसका फायदा राजद, जदयू या भाजपा लेगी, ये तो 2024 का विधानसभा और 2025 का लोकसभा चुनाव बताएगा. भाजपा भी अब हिंदू राजनीति के अलावा जाति की राजनीति भी खूब समझने लगी है. इसी रणनीति के तहत भाजपा ने हाल के वर्षों में बिहार प्रदेश अध्यक्ष पद पर नित्यानंद राय या संजय जायसवाल जैसे नेताओं को तरजीह दी. नीतीश सरकार में दो उपमुख्यमंत्री बनाते समय भी भाजपा ने इसका ख्याल रखा था. विधानसभा चुनाव में मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी को अतिपिछड़ा राजनीति की रणनीति के तहत ही भाजपा की ओर से तहजीह दी गई थी, मगर, आगे राजनीति और रणनीति थोड़ी बदल गई.

    आरक्षण की राजनीति कैसे तेज होगी, यह अब दिखने भी लगा है. भाजपा और जदयू ने अपना-अपना कार्यक्रम भी बना लिया है. भाजपा ने नीतीश कुमार पर आरक्षण विरोधी का आरोप लगाते हुए नीतीश कुमार का पुतला दहन किया है. अब आगे बाकी पार्टियों की रणनीति क्या होगी, ये देखना दिलचस्प होगा.  

     

     


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