महाकुंभ 2025: 40 साल से केवल चाय पर ज़िंदा हैं ये बाबा, महाकुंभ में चाय वाले बाबा के नाम से हुए प्रख्यात, जानिए और क्या है इनकी ख़ासियत 

    महाकुंभ 2025: 40 साल से केवल चाय पर ज़िंदा हैं ये बाबा, महाकुंभ में चाय वाले बाबा के नाम से हुए प्रख्यात, जानिए और क्या है इनकी ख़ासियत 

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): पौष पूर्णिमा के पावन स्नान के साथ ही आज से विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम महाकुंभ का शुभारंभ हो गया है. महाकुंभ सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि समूचे विश्व में आध्यात्मिक अनुष्ठान का केंद्र बन चुका है और दुनिया भर से यहां श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान करने आते हैं . महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक चलेगा. ऐसे में भारी संख्या में श्रद्धालु भी प्रयागराज पहुंच चुके हैं. इस बार पहला शाही स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा. वहीं दूसरा शाही स्थान बसंत पंचमी और तीसरा शाही स्नान शिवरात्रि के दिन होगा. ऐसे में भारी संख्या में लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाएंगे.

    40 साल से केवल चाय पर ज़िंदा हैं बाबा 

    वहीं महाकुंभ में कई बाबा, ऋषि मुनि भी प्रयागराज पहुंचे हैं. वही महाकुंभ में प्रतापगढ़ के एक बाबा की भी खूब चर्चा हो रही है. लोगों के बीच ये बाबा चाय वाले के नाम से मशहूर है. जानकारी के मुताबिक प्रतापगढ़ के चाय वाले बाबा 40 साल से केवल चाय पर ही जिंदा है. वह पूरे दिन में 10 बार चाय पीते हैं. इसके अलावा वह कोई भी भोजन ग्रहण नहीं करते हैं. इस बाबा का असल नाम दिनेश स्वरूप ब्रह्मचारी है . यह बाबा एक और चीज के लिए काफी प्रख्यात है. जानकारी के अनुसार यह बाबा पिछले 40 सालों से बिना कुछ खाए पिए और बिना कुछ बोले सिविल सेवा उम्मीदवारों को मुफ्त में कोचिंग दे रहे हैं . व्हाट्सएप के जरिए यह अपना ज्ञान छात्रों के बीच फैलाते हैं. आईएएस की तैयारी कर रहे बच्चों को व्हाट्सएप के जरिए स्टडी मैटेरियल प्रोवाइड करवाते हैं और यह स्टडी मैटेरियल बिल्कुल फ्री होता है. उनके शिष्यों का कहना है कि बाबा का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा शिष्यों को आईएएस बनाना है और समाज को शिक्षित करना है. 

    बाबा का उद्देश्य समाज को शिक्षित करना है

    बाबा लोगों के हर बात का जवाब देते हैं. लेकिन इनका जवाब देने का तरीका थोड़ा अलग है. मौनी बाबा हर बात का जवाब लिख कर देते हैं. उनकी कलम बोलने के स्पीड के बराबर चलती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सन्यास धारण करने से पहले चाय वाले बाबा एक टीचर थे. अंग्रेजी और गणित विषयों में वे विशेषज्ञ है. अब प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए अपने हाथ से लिखकर नोट तैयार करते हैं और इसके बाद व्हाट्सएप के जरिए स्टूडेंट्स को उसकी कॉपी भेज देते हैं. कई शिष्यों का दावा है कि बाबा से जिन-जिन अभ्यर्थियों ने शिक्षा ली उन्हें कामयाबी मिली और वह अफसर बन गए.ऐसे में चाय वाले बाबा महाकुंभ में काफी चर्चा का विषय बने हुए हैं.


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