वाल्मीकिनगर स्थित त्रिवेणी संगम में लाखों भक्त लगा रहे आस्था की डुबकी, उत्तर भारत का दूसरा सबसे बड़ा संगम स्थल माना जाता है यह 

    वाल्मीकिनगर स्थित त्रिवेणी संगम में लाखों भक्त लगा रहे आस्था की डुबकी, उत्तर भारत का दूसरा सबसे बड़ा संगम स्थल माना जाता है यह 

    बगहा(BAGAHA): माघ महीने की मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर वाल्मीकिनगर स्थित त्रिवेणी संगम में लाखों भक्त आस्था की डुबकी लगाने पहुँचे हैं. इंडो नेपाल बॉर्डर के वाल्मीकिनगर स्थित त्रिवेणी संगम तट पर दोनों देशों के लाखों श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त से ही नारायणी गंडक नदी के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगा रहें हैं. मेला में भक्तों का तांता लगा है. वहीं श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात भगवान विष्णु, शिव और सूर्य देव की आराधना कर गौ दान-पुण्य किया.

    सुरक्षा के किए गए पुख्ता इंतजाम 

    दरअसल मौनी अमावस्या पर आत्मिक शुद्धि का संकल्प लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हर वर्ष त्रिवेणी संगम तट पर उमड़ती है. लिहाजा भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए पुलिस प्रशासन के साथ SSB जवानों ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है. वाल्मीकिनगर के स्नान घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल के जवान और मेडिकल टीम की भी तैनात की गई है. आलम यह है की श्रद्धालुओं की अधिक संख्या के कारण वाल्मीकिनगर और बगहा में तीन-तीन किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं हैं.

    उत्तर भारत का दूसरा सबसे बड़ा संगम स्थल है वाल्मीकिनगर स्थित त्रिवेणी संगम

    बताया जा रहा है की देश में प्रयागराज के बाद वाल्मीकिनगर स्थित त्रिवेणी संगम जो गंडक, तमसा और सोनभद्र इन तीन नदियों के संगम स्थल के रूप में विश्व प्रसिद्ध तीर्थंस्थल है जिसे उत्तर भारत का दूसरा सबसे बड़ा संगम स्थल माना जाता है. प्रयागराज के बाद इस स्थान का विशेष धार्मिक महत्व है. प्रत्येक वर्ष बिहार,
    उत्तर प्रदेश और नेपाल के विभिन्न इलाकों से लाखों श्रद्धालु यहां स्नान-दान करने पहुंचते हैं.
    बता दें की मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी स्नान के बाद नहान मेला में तेज़पता, नारंगी औऱ लावा की खरीददारी व बिक्री ख़ूब होती है जो साल में एक बार यहां बड़े बाज़ार के तौर पर देखा जाता है.


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