पलायन का दर्द क्या होता है, यह मैं जानता हूं, बेरोजगारी पर छलका खेसारी लाल का दर्द, कहा-सड़ चुका सिस्टम होगा दुरुस्त

    पलायन का दर्द क्या होता है, यह मैं जानता हूं, बेरोजगारी पर छलका खेसारी लाल का दर्द, कहा-सड़ चुका सिस्टम होगा दुरुस्त

    छपरा(CHAPRA): भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और अब राजनीति की पारी खेलने उतरे खेसारी लाल यादव ने अपने अंदाज़ में जनता के दिल की बात कही.शहर की अव्यवस्था, पलायन और टूटी उम्मीदों पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि पलायन का दर्द क्या होता है, यह मैं जानता हूं. जब अपने गांव के लोग रोजी-रोटी के लिए बाहर जाते है तो दिल टूट जाता है लेकिन अब यह हालात बदलेंगे. छपरा अब जगमगाएगा सगाई, पढ़ाई या दवाई, किसी चीज़ में दिक्कत नहीं होगी. खेसारी ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें “नेता जी” या “मंत्री जी” कहलाने का कोई शौक नहीं है. वे जनता के बीच बेटे की तरह रहना चाहते हैं और उनकी सेवा ही उनका धर्म होगा.उन्होंने कहा कि सड़ चुके सिस्टम को दुरुस्त करना उनकी पहली प्राथमिकता है.

    खेसारी ने कहा गरीबी, भेदभाव और पलायन की मार झेली है

    खेसारी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया और कहा कि उन्होंने गरीबी, भेदभाव और पलायन की मार झेली है.आज जब उनके पास मंच है, तो वे इसे जनसेवा के लिए इस्तेमाल करेंगे.उन्होंने शत्रुघ्न यादव से खेसारी बनने तक के सफर को “संघर्ष भरा लेकिन प्रेरणादायक” बताते हुए खेसारी भावुक होते नजर आए. खेसारी बोले, तो लोग बार-बार तालियों से उनका स्वागत करते रहे.

    बदलाव लाने का हौसला आपसे ही मिलेगा

    जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा मैं कोई वादा नहीं कर रहा, बस भरोसा चाहता हूं. बदलाव लाने का हौसला आपसे ही मिलेगा.उन्होंने छपरा को “अपने दिल का शहर” बताते हुए कहा कि वे इसे बिहार का आदर्श शहर बनाना चाहते है.


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