नये मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के सामने पहली चुनौती, 5 तारीख को साबित करना है बहुमत, मंत्रिमंडल का करना है विस्तार 

    नये मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के सामने पहली चुनौती, 5 तारीख को साबित करना है बहुमत, मंत्रिमंडल का करना है विस्तार 

    टीएनपी डेस्क(Tnp desk):- चंपई सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है, उनके सामने  मुश्किल से 11 महीनों का कार्यकाल होगा. लेकिन, इससे भी पूरा करने के लिए अभी बहुमत साबित करने की बड़ी चुनौती है. यानि सरकार चलाने के लिए पहला इम्तहान पास करना ही होगा, तब ही आगे की राह पर चला जा सकता है. 

    सभी को एक रखने की चुनौती 

    हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद सोरेन परिवार के विश्वासी चंपई झारखंड के मुख्यमंत्री बनें. सीधे-साधे और सरल स्वभाव के चंपई के सामने सरकार चलाने की जिम्मेदारी और चुनौती तो होगी ही. लेकिन, इससे पहले पहला पड़ाव  बहुमत साबित करने का होगा. क्योंकि, अभी डर सेंधमारी का सता रहा है . ये अनजाने खतरे के चलते ही  जेएमएम और कांग्रेस के विधायकों को हैदराबाद चार्टर प्लेन से भेज दिया गया है. ताकि कोई भी छिटके नहीं और न ही धोखा दे. बताया जा रहा है कि वसंत सोरेन को इसकी जिम्मेदारी दी गई है. निजामों के शहर हैदराबाद जाने बहुत हद तक खतरा तो टला है. लेकिन, खत्म नहीं हुआ है.  

    कौन बनेगा डिप्टी सीएम 

    चंपई तो मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली, उनके साथ सत्यानंद भोक्ता और आलमगीर आलम ने भी मंत्री पद की शपथ ली है . सवाल है कि दों उप मुख्यमंत्री बनाने की बात सामने आ रही है. जिनमे कांग्रेस के आलमगीर आलम और बसंत सोरेन का नाम सामने आ रहा है. लिहाजा, इसे देखते सभी को साथ लेकर चलना भी उनके लिए चुनौती है. इसके साथ ही कौन-कौन उनके मंत्रीमंडल के सदस्य बनेंगे. इसे भी देखने वाली बात होगी, क्योंकि हेमंत सरकार के मंत्रिमंडल अलग था. इस बार कैसा होगा किसका पत्ता कटेगा और कौन सा नया चेहरा होगा. इस पर भी चंपई को माथापच्ची करनी होगी.  

    कांग्रेस विधायकों से तालमेल 

    कांग्रेस के आलमगीर आलम ने मंत्री पद की शपथ ले ही . बहुमत साबित करने के लिए उनके सहयोगी 17 कांग्रेस विधायकों को भी एकजुट रखना होगा. इसके साथ ही  हेमंत मंत्रिमंडल में जिन चेहरों को मंत्री पद दिया गया था. क्या वही चेहरे यहां भी मंत्री पद पर बनें रहेंगे या फिर कोई नये नाम की एंट्री होगी. इस पर भी चंपई सोरेन को दिमाग लगाना होगा. कांग्रेसी विधायकों को समेटकर साथ रखने से ही आगे के काम होंगे और गठबंधन की सराकर आगे चलेगी. 
    मौजूदा वक्त में चंपई सोरेन को अपने राजनीतिक करियर का सबसे  बड़ा ओहदा और तोहफा तो मिला ही है. लेकिन, इसके साथ ही कई चुनौतियां भी इंतजार कर रही है. लेकिन, सबसे बड़ी और पहली चुनौती फ्लोर टेस्ट पास करना है. 


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news