मानसून की बेरूखी से अन्नदाताओं के चेहरे बुझे, झारखंड के आधे से अधिक खेतों में अभी भी नहीं हो सकी धान की रोपाई.

    मानसून की बेरूखी से अन्नदाताओं के चेहरे बुझे, झारखंड के आधे से अधिक खेतों में अभी भी नहीं हो सकी धान की रोपाई.

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK):-बरसात का मौसम तो आया हुआ है,लेकिन बारिश की लुका-छुपी और नदारद रहने से किसानों की आंखों में उम्मीदें गायब होते जा रही है. 8 अगस्त तक जमकर पानी बरसा, मगर इसके बाद बारिश की लुका-छिपी आज तक जारी है. इसका सबसे ज्यादा घाटा किसानों को उठाना पड़ रहा है. झारखंड में धान की खेती पर इसका अच्छा-खासा असर पड़ा है. 18 अगस्त तक 43.66 प्रतिशत धान की कुल रोपाई हुई थी. राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 18 अगस्त तक 18 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 7.85 लाख हेक्टेयर भूमि पर ही धान की रोपाई हुई है.

    कम बारिश बनीं परेशानी

    कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक जून-जुलाई में बारिश होने पर धान की रोपाई अच्छी होती है. लेकिन, कुछ सालों में मॉनसून में देरी या कम पानी बरसने की वजह से काफी किसान अगस्त के मध्य तक ही रोपाई करते हैं. लेकिन, इससे फसल का उत्पादन अच्छा नहीं होता है.

    जून-जुलाई में कम हुई बारिश

    जून-जुलाई में कम बारिश होने के चलते किसानों को परेशानी उठानी पड़ी. इसी के चलते खेतों में धान की रोपनी प्रभावित हुई. हालांकि, पिछले साल की तुलना में थोड़ा बेहतर है. लेकिन, उम्मीदों के मुताबिक अभी भी धान की रोपाई नहीं हुई है. आज भी झारखंड के आधे से भी कम खेतों में धान की रोपनी हो सकी है. अगर आंकड़ों को देखे तो राज्य में साल 2022 में भी 18 अगस्त तक 30.83 तक ही रोपाई ही हो पाई थी. वही, इस साल 18 अगस्त तक फीसदी 43.66  फीसदी ही खेतों पर धान लगाया जा सका. बताया जा रहा है कि अगर एक हफ्ते तक ऐसी ही स्थिति रही,तो फिर सरकारी स्तर पर सूखा घोषित करने के संबंध में कोई निर्णय किया जाएगा.

    सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश

    लगातार दूसरे साल प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई है, मौसम विभाग के मुताबिक, झारखंड में बारिश की कमी अब भी 35 फीसदी है. प्रदेश में एक जून से 18 अगस्त तक सामान्य बारिश 689.8 मिलीमीटर की तुलना में अब तक 422.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. राज्य में 31 जुलाई तक 47 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई थी.


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