क्या बिहारी होने की सजा मिल रही है महाधिवक्ता राजीव रंजन को! लोबिन का वार, इनके रहते लागू नहीं हो सकता 1932 का खतियान

    क्या बिहारी होने की सजा मिल रही है महाधिवक्ता राजीव रंजन को! लोबिन का वार, इनके रहते लागू नहीं हो सकता 1932 का खतियान

    रांची(RANCHI): लम्बे समय से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को निशाने पर लेते रहे झामुमो विधायक और झारखंड बचाव मोर्चा के संस्थापक लोबिन हेम्ब्रम ने अब महाधिवक्ता राजीव रंजन के प्रसाद मोर्चा खोल दिया है. लोबिन हेम्ब्रम ने 1932 का खतियान लागू नहीं होने के लिए सीधे-सीधे राजीव रंजन को जिम्मेवार कहा कि राजीव रंजन किसी भी हालत में 1932 का खतियान लागू नहीं होने देंगे. लोबिन ने याद दिलाया कि जब पहली बार बाबूलाल के शासनकाल में 1932 का खतियान को लागू करने की कोशिश की गयी थी, तब राजीव रंजन के द्वारा ही हाईकोर्ट में इसकी धज्जियां उड़ायी गयी थी.

    बाबूलाल के समय राजीव रंजन ने 1932 के खिलाफ की थी हाईकोर्ट में पैरवी 

    दरअसल राजीव रंजन मूलरुप से बिहार के बक्सर जिला के रहने वाले हैं. जब बाबूलाल मरांडी के मुख्यमंत्रित्व काल में डोमिसाइल नीति की घोषणा की गई थी, राज्य सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गयी थी, इसी बीच मामला हाईकोर्ट में चला गया. राज्य सरकार की ओर से इसके पक्ष में पैरवी करने के लिए दिल्ली से बड़े-बड़े वकीलों को बुलाया गया था. लेकिन राजीव रंजन की दलीलों के सामने किसी न चली, और आखिरकार हाईकोर्ट से राज्य सरकार की डोमिसाइल नीति को रद्द कर दिया था. अब इन्ही राजीव रंजन पर 1932 का खतियान को लागू करने की जिम्मेवारी है, महाधिवक्ता के रुप में वह कोर्ट में इसका बचाव करेंगे. 

    लोबिन को अभी भी सताता रहता है वह दर्द

    लोबिन आज भी उस दर्द को नहीं भूले हैं, उनको बुरा तब भी लगा था, जब हेमंत सरकार के द्वारा राजीव रंजन को महाधिवक्ता के रुप में नियुक्ति की गयी थी. लेकिन अब जब एक बार उन्ही राजीव रंजन पर इस मामले में बचाव करने की जिम्मेवारी है, लोबिन हेम्ब्रम के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं, राजीव रंजन की विश्वसनीयता और प्रतिबद्धता पर संदेह हो रहा है. जिसका इजहार उनके द्वारा उनके अपने अंदाज में किया जा रहा है. और वह पूरे ताल ठोक कर राजीव रंजन को हटाने की मांग कर रहे हैं.

    रिपोर्ट: देवेंद्र कुमार 


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