सांप्रदायिक हिंसा से झुलस रहे मेवात को बोला जाता है देश का दूसरा जामताड़ा, जो साइबर क्राइम के लिए है बदनाम

    सांप्रदायिक हिंसा से झुलस रहे मेवात को बोला जाता है देश का दूसरा जामताड़ा, जो साइबर क्राइम के लिए है बदनाम

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK):-हरियाणा के नूंह जिले का मेवात इन दिनों खासी सुर्खियों में हैं, सोशल मीडिया से लेकर टीवी औऱ अखबारों में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर जोरों से चर्चा में हैं. जहां लगातार झगड़े की आग से हालात बद से बदतर होते जा रहें है. जो फिलहाल अभी भी बेकाबू है. दरअसल, 31 अगस्त को दो समुदायों के बीच हुई हिंसा की आग ऐसी फैली कि, जो रूकने का नाम नहीं ले रही है. पुलिस-प्रशासन और सरकार के लिए यहां की भड़की हिंसा चुनौती बनी हुई है. मेवात का हिस्सा सिर्फ हरियाणा ही नहीं, बल्कि कुछ राजस्थान औऱ उत्तर प्रदेश में भी आता है. लिहाजा, लोगों की तहजीब और रहन-सहन का भी असर यहां दिखता है. बेशक इस इलाके में अभी तनाव पसरा पड़ा है. लेकिन, यहां का इलाका साइबर ठगी के लिए भी देश में बदनाम है. जिसे देश का दूसरा जामताड़ा भी बोला जाने लगा है. यहां साइबर थाने को भी निशाना बनाया गया है. लिहाजा इसे लेकर तमाम सवाल भी उठ रहें हैं.

    देश का दूसरा जामताड़ा

    मेवात में साइबार क्राइम की जड़े दिन ब दिन गहरी होती जा रही है. जिस तरह झारखंड का जामताड़ा जिला, जो किसी पहचान की मोहताज नहीं है और देश में साइबर अपराध के गढ़ के तौर पर जाना जाता है. जहां ठग इंटरनेट और फोन से चुटकियों में देश के नामचीन लोगों के करोड़ों रुपए बैंक के खाते से उड़ा लेते हैं. ठीक उसी राह पर धीरे-धीरे मेवात भी बढ़ता ही जा रहा है. चमक-दमक भरी जिंदगी वाले गुरुग्राम से ज्यादा दूरी पर मेवात नहीं है. लेकिन, यहां के पिछड़ापन और मुफलिसी भरा जीवन देखकर कोई भी हैरत में पड़ा जाएगा. अमिरी-गरीबी की इसी फर्क के चलते यहां के युवा रातों-रात धनवान बनने के चक्कर में साइबर ठगी की दुनिया में अपने पैर रख रहें हैं. जो देश का दूसरा जामतड़ा बनता जा रहा है. लाखों-करोड़ों का खेल एक रात में हो जाते है. यहां किसी ठग के पास बेशुमार पैसे आते हैं, तो देश का कोई अनजान शख्स इनके चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई गंवा देता है.

    मेवात बन रहा साइबर क्राइम का गढ़

    इसी साल मार्च में केन्द्र सरकार ने नौ राज्यों के 32 इलाकों को साइबर क्राइम के गढ़ के तौर पर बताया था. जिसमे मेवात का भी जिक्र था. यहां की गलियों औऱ सड़कों पर भी साइबर क्राइम से बचाव के लिए बड़े-बड़े बैरिकेड,बैनर और होर्डिंग लगें हुए हैं. जो पहले ही चेतवानी दे देते है कि जरा संभल के इंटरनेट औऱ फोन का इस्तेमाल करें. नहीं तो एक झांसे में आप अपनी दौलत गंवा सकते हैं.

    अप्रैल में पुलिस का एक्शन

    इसी साल अप्रैल में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया था. पांच हजार पुलिसकर्मियों की 102 टीमों ने गांवों में छापेमारी करके सैकड़ों संदिग्ध को हिरासत में लियाथा. इनमे 66 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी.दरअसल, देशभर से 28 हजार लोगों से 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी की शिकायत मिली थी. पुलिस ने फर्जी आधार, पैन, सिम कार्ड, पीओसी मशीन, मोबाइल औऱ लेपटॉप जब्त किया था.

    जामताड़ा पर बनी फिल्म से मिली सीख !

    2020 में नेटफिल्किस पर जामताड़ा को लेकर वेबसीरीज आई थी. इस फिल्म के जरिए साइबर ठगों की जिंदगी औऱ ठगी के तरह-तरह के तरीके बताए गये थे. जिस तरह जामताड़ा के ठग फर्जी सीम कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं. ठीक उसी तरह मेवात में भी होता है. ज्यादातर ठग अपना शिकार बुजुर्गों और महिलाओं को ही अपने जाल में फंसाते हैं, क्योंकि युवा को तकनीकी चिजें औऱ जानकारियां ज्यादा होती है. इसलिए वो कम ही झांसे में आते हैं. बताया जाता है कि ठगी के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लास भी चलाए जाते हैं. इसके लिए चालिस हजार से 1 लाख रुपए फीस भी ली जाती है. जामताड़ा की तर्ज पर ही मेवात के ठग चल रहे हैं. यहां भी ज्यादातर गांवों में फर्जी सीम के जरिए एक ग्रुप बनाकर ठगी करते हैं. जिसमे एक शख्स फोन पर अपने शिकार से बात करता है, तो दूसरा सारी डिटेल्स भरकर उसके पैसे उड़ाता है. मेवात अभी सांप्रदायिक हिस्सा के चलते लहुलुहान है और इसकी मिट्टी औऱ आबोहवा में अभी नफरत फैली हुई है. फिलहाल, अभी हम यहां अमन की उम्मीद करें ताकि एकबार फिर जिंदगी आम दिनों की तरह पटरी पर लौटे.

    रिपोट- शिवपूजन सिंह


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