सूखा को लेकर सरकार जल्द करेगी घोषणा, जानिये कितने प्रखंड की है तैयारी

    सूखा को लेकर सरकार जल्द करेगी घोषणा, जानिये कितने प्रखंड की है तैयारी

    रांची (RANCHI):  बारिश के दरम्यान सियासी तपिश के बीच यह खबर खेती-किसानी करने वालों को राहत दे सकती है. बात की शुरुआत मॉनसून सत्र से करते हैं. आपको याद ही होगा तब विधानसभा में राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर भाजपा ने जम कर हंगामा किया था. सदन में सूखाड़ पर विशेष चर्चा भी हुई थी. कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने स्वीकार किया था कि झारखंड में 27 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है पर लगभग 7 लाख हेक्टेयर में ही खेती हो पायी है. राज्य अभी भी रोपाई के निर्धारित लक्ष्य का 35 फीसदी ही हासिल कर पाया है. इधर, कृषि विभाग की निदेशक निशा उरांव ने मीडिया से बताया है कि सरकार सुखाड़ की घोषणा जल्द कर सकती है. किसानों को राहत पैकेज भी सरकार दे सकती है.

    कृषि मामले की रिपोर्टिग करने वाले पत्रकार नीलमणि की मानें तो राज्य के 243 प्रखंडों में सूखाग्रस्त घोषित करने की तैयारी की जा रही है. कृषि विभाग ने केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक आपदा प्रबंधन विभाग को इस आशय का प्रस्ताव भेजा है. बता दें कि इससे पहले सूखाग्रस्त प्रखंडो 180 बताए गए थे। सूखाग्रस्त सभी प्रखंडों की रिपोर्ट आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी गई है.

    सूखा की कैसे होती है जांच

    पहले रोपाई और बुवाई का आंकड़ा जमा किया जाता है. इन सब मानक के अलावा तीन और फैक्टर की जांच की जाती है. जिनमें कितने दिन बारिश हुई और कितना दिन सूखा रहा, इसका आंकड़ा सिंचाई विभाग तैयार करता है. मिट्टी की नमी की जांच की जाती है. सूखाग्रस्त घोषित करने से पहले रिमोट सेंसिग भी कराई जाती है. विभागीय निदेशक के अनुसार विभिन्न जिलों का दौरा विभाग की ओर से ग्राउंड लेवल पर चेक किया जाएगा. सभी चीजें सही मिलने पर सूखा का एलान किया जाएगा.

    अब जानिये खेती की हक़ीक़त

    राज्य में धान की खेती बहुत कम हो सकी है. इसका प्रतिशत सिर्फ 30 ही है. पिछले पांच सालों में ऐसा पहली बार हुआ है. वो 2018 का साल था जब 21 प्रतिशत ही धान की खेती हो सकी थी. जबकि 2019 में 50 प्रतिशत, 2020 में 90 और 2021 में 91 फीसदी से अधिक भूमि में धान की खेती हुई थी. नीलमणि बताते हैं कि मक्का 60 प्रतिशत, दलहन 44, तिलहन 40 और मोटे अनाज की 29 प्रतिशत में ही खेती हो सकी है. पिछले साल से खरीफ की फसल की खेती 46 फीसदी कम है.

    बरखा रानी से रूठे ही रहे किसान

    खेती के लिए बारिश का होना बेहद जरूरी है. लेकिन इस बार राज्य में बहुत कम पानी हुआ है. कहीं हुई भी तो हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा रिकॉर्ड की गई है. जामताड़ा, गोड्डा, साहबगंज और पाकुड़ में वर्षा 60 प्रतिशत से भी कम हुई है. पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिले में सामान्य वर्षा तो बाकी जिलों में औसत से काफी कम वर्षा हुई है.

     


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