अब इन दो नेताओं के हाथों में रहेगी झारखंड भाजपा की डोर, जानिये क्या हो सकते हैं बदलाव

    अब इन दो नेताओं के हाथों में रहेगी झारखंड भाजपा की डोर, जानिये क्या हो सकते हैं बदलाव

    रांची (RANCHI): देश में जो स्थान कभी कांग्रेस का हुआ करता था, उसकी जगह अब भाजपा ने ले ली है. सबसे तेजी से उसका जनाधार बढ़ रहा है. वो खुद को विश्व की सबसे बड़ी सियासी पार्टी कहती है. केंद्र समेत कई राज्यों में उसकी सरकार है. बिहार में जब से नीतिश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़ा है, पार्टी ने समूचा ध्यान अब बिहार-झारखंड में संगठन को मजबूत करने पर लगा दिया है. इसके लिए कर्मवीर बने प्रदेश में नया संगठन मंत्री अगस्त में बनाया गया, अब सांसद दिलीप सैकिया की जगह सांसद डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी को पार्टी ने प्रदेश प्रभारी बनाया है. चलिये पहले जानते हैं कि ये दो दिग्गज कौन हैं, जिनके सहारे झारखंड की लोकसभा सीट भाजपा जीतना चाहती है.

    उत्तरप्रदेश में संघ के प्रांत प्रचारक रह चुके हैं कर्मवीर

    धर्मपाल सिंह अबतक प्रदेश में संगठन महामंत्री रहे हैं, लेकिन उनकी जगह अब यह जिम्मेदारी उत्तरप्रदेश के कर्मवीर को दे दी गई है. अभी तक वह उत्तर प्रदेश के सह संगठन मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. वह उत्तरप्रदेश में संघ के प्रांत प्रचारक रह चुके हैं. मजबूत संगठन क्षमता के कारण ही उन्हें यहां भेजा गया है. उनकी संगठन क्षमता का इस्तेमाल पार्टी यूपी चुनाव में जाट वोटरों को संगठित करने में कर चुकी है. झारखंड में आदिवासियों के बीच और बेहतर पैठ बनाना पार्टी का लक्ष्य है, जिसमें कर्मवीर की भूमिका सार्थक हो सकती है.

    यूपी में सरकार बनवाने में लक्ष्मीकांत की रही भूमिका

    1964 से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भाजपा के दिग्गज नेता और बड़े रणनीतिकार माने जाते हैं. यूपी में चार बार विधायक रह चुके हैं. उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में उनकी महती भूमिका रही है.  इसके अलावा वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 80 लोकसभा सीटों में से 71 सीट पर जीत कराने में भी इनकी रणनीति रही है. तब वही यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे. इनके अनुभव का लाभ पार्टी झारखंड में भी उठाना चाहेगी. हालांकि झारखंड में अपनी भूमिका के सवाल पर मीडिया से लक्ष्मीकांत ने बताया कि झारखंड कोई चुनौती नहीं है. एक कार्यकर्ता की हैसियत से प्रेदश अध्यक्ष और पार्टी सदस्यों के साथ मिलकर वह काम करेंगे.

    पहली चुनौती प्रदेश में अध्यक्ष बनाने की

    नए संगठन मंत्री, नए प्रभारी और  नए अध्यक्ष और नई टीम के साथ पार्टी मैदान में उतरना चाहती है. इसलिए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर नए नाम की चर्चा चल रही है. झारखंड में अभी दीपक प्रकाश के पास अध्यक्ष की कमान है. उनका कार्यकाल फरवरी 2023 में खत्म होने जा रहा है. क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्षों का होता है. पार्टी ने नए अध्यक्ष की तलाश शुरू कर दी है. चलिये बताते है कि संगठन विस्तार को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व क्या कर रहा है.

    जातीय समीकरण साधने का प्रयास

    नए अध्यक्ष को लेकर पार्टी में विचार-मंथन चल रहा है. चूंकि अभी नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी हैं. वो आदिवासी समुदाय से आते हैं. इसलिए कहा जा रहा है कि भाजपा का अध्यक्ष पद किसी गैर-आदिवासी को मिल सकता है. ऐसा होने पर संतुलन अच्छा रहेगा. पार्टी के सभी नए-पुराने वरिष्ठ नेताओं को जोड़ना सहज होगा. नया अध्यक्ष गैर-आदिवासी होने के साथ पिछड़े वर्ग से हाे सकता है. इसमें भी वैश्य समाज का ध्यान रखे जाने की बात कही जा रही है. क्योंकि इनकी संख्या राज्य में अच्छी-खासी है.

    ये हैं अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल

    नए अध्यक्ष के लिए अभी तक पिछले आदित्य प्रसाद साहू और राकेश प्रसाद का नाम सरेफेहरिस्त है. दोनों पिछड़ा वर्ग से आते हैं. पार्टी ओबीसी मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए ही नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय कर सकती है. आदित्य साहू पिछले महीने राज्य सभा सदस्य बनाए गए, वहीं राकेश प्रसाद राज्य बीस सूत्री कार्यक्रम के उपाध्यक्ष रह चुके है. पिछले विधान सभा चुनाव में पलामू प्रमंडल के प्रभारी के तौर पर आदित्य साहू ने पार्टी को सफलता भी दिलाई थी. वहीं बीस सूत्री समिति के उपाध्यक्ष रहते हुए राकेश प्रसाद का प्रदर्शन भी अच्छा माना जाता रहा है.

     


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