किस बात का जोहार? लूट और झूठ ही हेमंत सरकार की पहचान, ओबीसी आरक्षण के सवाल पर आजसू प्रमुख सुदेश महतो का तंज

    किस बात का जोहार? लूट और झूठ ही हेमंत सरकार की पहचान, ओबीसी आरक्षण के सवाल पर आजसू प्रमुख सुदेश महतो का तंज

    रांची(RANCHI)-झामुमो के जोहार यात्रा पर तंज कसते हुए आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने हेमंत सरकार पर बड़ा हमला बोला है, सुदेश महतो ने कहा है कि इस सरकार को अब नींद से जगाने से भी राज्यवासियों को कोई लाभ नहीं होने वाला है, लूट और झूठ इस सरकार की पहचान बन चुकी है. सीएम हेमंत को जोहार यात्रा निकालने के पहले इस बात का जवाब देना चाहिए कि किस बात का जोहार? 1932 की बात करते करते 1923 लागू कर दिया, 60:40 के फार्मूले से स्थानीय युवकों की किश्मत पर ताला लगा दिया गया.

    ना पिछड़ों को आरक्षण मिला और ना युवाओं को रोजगार

    हेमंत सोरेन की सरकार पर तंज कसते हुए आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने कहा कि 40 महीने की इस सरकार में ना तो पिछड़ी जातियों को आरक्षण मिला और ना ही युवाओं को रोजगार. आज भी युवा रोजगार की तलाश में सड़कों पर प्रर्दशन करने को बाध्य है, फिर भी सरकार को इस बात की दाद देनी पड़ेगी कि जोहार यात्रा निकाल कर लोगों को दिग्भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है. सरकार में हिम्मत है तो वह 60:40 के फार्मूले पर बहस करवाये, यह कैसी नीति है जहां 40 फीसदी सीटों को  बाहरियों के लिए खुला छोड़ दिया गया है. हेमंत सरका की नीतियों से युवाओं का ना सिर्फ वर्तमान बर्बाद हुआ है, बल्कि उनका भविष्य भी दांव पर लग गया है. सरकार यह दावा करती है कि स्थानीय कंपनियों में 75 फीसदी नौकरियां झारखंडी युवाओं को मिलेगी, लेकिन बिना स्थानीय नीति के झारखंडियों को चिह्नित कैसे किया जायेगा, इसका कोई जवाब सरकार के पास नहीं है.

    एयर एंबुलेंस की योजना पर तंज

    सरकार की बहुचर्चित एयर एंबुलेंस की योजना पर तंज कसते हुए सुदेश महतो ने कहा कि एयर एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध करवाने के पहले सरकार को  राज की साधारण और बड़ी आबादी को रोड एंबुलेंस और मुकम्मल प्राथमिक इलाज की व्यवस्था करवानी चाहिए थी.

    ट्रिपल टेस्ट नहीं करवा कर जारी है पिछड़ी जातियों की हकमारी

    निकाल चुनाव के सवाल पर सरकार को घेरते हुए सुदेश महतो ने कहा कि उनके द्वारा शुरु से ही ट्रिपल टेस्ट करवाने की मांग की जा रही थी, लेकिन सरकार पिछड़ी जातियों को आरक्षण प्रदान करने के मुड में ही नहीं थी, इसीलिए एक सोची समझी रणनीति के तहत ट्रिपल टेस्ट नहीं करवाया गया और पंचायत चुनाव में पिछड़ी जातियों को आरक्षण नहीं मिला, अब निकाय चुनाव में भी यही खेल दुहाराये जाने की तैयारी है.


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