Jharkhand Politics: घाटशिला का "बैल" 14 के बाद क्यों घुमेगा पूरे झारखण्ड में, क्या बताएगा आदिवासियों को !

    Jharkhand Politics: घाटशिला का "बैल" 14 के बाद क्यों घुमेगा पूरे झारखण्ड में, क्या बताएगा आदिवासियों को !

    धनाबाद (DHANBAD) : झारखंड के घाटशिला का "बैल" अब पूरे राज्य में घुमेगा, 14 तारीख को चुनाव परिणाम के बाद झारखंड में "बैल" की राजनीति तेज होगी. भाजपा की ओर से झामुमो पर हमला बोला जाएगा, तो झामुमो भी चुप नहीं बैठेगा. यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भले ही अपने मुंह से कुछ नहीं कहे, लेकिन पार्टी के प्रवक्ता जरूर बोलेंगे. दरअसल, हेमंत सोरेन ने घाटशिला चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि "बैल"  खाया -पीया झामुमो में और चुनाव लड़ने के लिए पहुंच गया भाजपा में.  

    चंपाई सोरेन भी कड़ा तेवर में है, परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे है 

    उनका इशारा चंपाई  सोरेन सहित उनके पुत्र बाबूलाल सोरेन की ओर था. चंपई सोरेन ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि- बैल कहता है, सबको तो झामुमो  में उसने बैल जैसा बांधकर रख दिया है. मतलब साफ है कि परिणाम के बाद यह लड़ाई आगे बढ़ेगी. वैसे, भी झारखंड में सत्ता और विपक्ष में राजनीति चल रही है. यह  अलग बात है कि भाजपा अभी भी मुद्दे की तलाश में है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी आक्रामक तेवर अपनाए हुए है. 
     
    घाटशिला उपचुनाव बहुत कुछ तय करेगा 
     
    घाटशिला उपचुनाव में अगर झामुमो की जीत होती है, तो झामुमो के लिए यह सुखद बात होगी और अगर कहीं बाबूलाल सोरेन आगे निकल जाते हैं, तो फिर झामुमो  के लिए यह कठिन बात हो सकती है. वैसे भी अगर घाटशिला उपचुनाव का रिजल्ट भाजपा के पक्ष में नहीं आया, तो चंपई सोरेन के राजनीतिक भविष्य पर संकट पैदा हो सकता है. इसलिए भी चंपई सोरेन चुनाव परिणाम के बाद ज्यादा आक्रामक दिख सकते है. भाजपा सूत्रों के अनुसार हमले की रूपरेखा तय कर ली गई है और चंपई सोरेन आदिवासियों के बीच जाकर बताएंगे कि उन्हें "बैल" कहा गया, जबकि वह झारखंडआंदोलनकारी है.  गुरु जी के साथ आंदोलन किया है. 

    झारखंड में पहली बार कोई सरकार रिपीट की है 
     
    वैसे झारखंड में यह पहला मौका है, जब कोई भी सरकार रिपीट की है. 2024 के विधानसभा चुनाव में झामुमो 34 सीट  लाकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरा है. कांग्रेस को 16 सीट मिली है, तो राजद  को चार सीट मिली है. वैसे, भी बिहार में झामुमो  को सीट नहीं मिलने की वजह से झारखंड में महागठबंधन की राजनीति में भी कड़वाहट देखी जा रही है. कांग्रेस कोटे के चार मंत्री और राजद कोटे के एक मंत्री के भविष्य पर सवाल खड़े किए जा रहे है. 14 नवंबर के बाद आगे राजनीति गतिविधियां कैसे बढ़ेगी, इस पर सबकी नजर रहेगी.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  


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