स्वरोजगार योजना से महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर, पशु पालन से मिल रहा आर्थिक मजबूती


लोहरदगा (LOHARDAGA): जिला में लगातार पशुधन में वृद्धि हो रही है. यहां के ग्रामीण अब पलायन करने के बजाय गांव में गठित महिला मंडल से जुड़ रहे हैं. इसके सहयोग से ग्रामीण अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर पा रहे हैं.ग्रामीण पहले दूसरे राज्यों और इलाकों में मजदूरी करने का काम किया करते थे. लेकिन अब ये महिला मंडल से सहयोग लेकर बकरी पालन और मुर्गी पालन की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं.
जीवन में आया अच्छा बदलाव
लोहरदगा जिला क्षेत्र के सेन्हा प्रखंड के चितरी डारू गांव में दर्जनों घरों में बकरी पालन को बढ़ावा मिल रहा है. क्योंकि यहां की महिलाएं अब रोजगार के लिए ईट भट्ठों की ओर नहीं, बल्कि अपने गांव में गठित महिला मंडल की ओर अपना कदम आगे बढ़ा रही है. पशुधन के माध्यम से इन ग्रामीणों को निरंतर आर्थिक लाभ मिल रहा है. इस गांव में महिला मंडल के माध्यम से उन्हें चार बकरी एक बकरा मिलते हैं. अपने मेहनत और विश्वास के कारण इन महिलाओं को सफलता मिल रही हैं. पालतू पशुओं को बेच कर, साथ ही बकरी के दूध और अंडा को भी बेचकर महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं. या यूं कहा जाए कि ग्रामीण महिलाओं का गांव में ही गठित महिला मंडल के प्रयास और आपसी सहयोग ने इनके जीवन के जीने के तरीके को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. मजदूरी का कार्य करने के साथ-साथ कर्ज में डूबे रहने वाले ग्रामीणों को अब काफी लाभ पहुंच रहा हैं. सीधे तौर पर कहा जाए तो जब इन्हें पैसों की आवश्यकता होती हैं, तो यह बकरी-मुर्गी या फिर अंडा-दूध बेचकर अपनी जरूरतों को पूरा कर लेती हैं. ग्रामीणों का कहना है कि महिला मंडल से मिलने वाले सहयोग के बाद ये धीरे धीरे आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं. गांव में विकास की बयार इन पशुओं के माध्यम से भी देखने को मिल रहा है अब ये ग्रामीण राज्य सरकार के अन्य योजनाओं का भी लाभ उठाने की दिशा में क़दम बढ़ा रहे हैं.

दिया जा रहा पशुओं को पालने का प्रशिक्षण
पशुपालन विभाग के पदाधिकारी का कहना है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ जिला के ग्रामीणों को पूरी तरह से देने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है. ताकि इन किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिल सके. कहा कि सरकार की योजनाओं के तहत इन्हें पालतू पशु और मुर्गी उपलब्ध कराया जा रहा है. साथ ही नियमित रूप से इनके देखरेख को लेकर ग्रामीणों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है. ताकि मौसम के अनुरूप इन्हें कोई परेशानी न हो. पशुओं को पालने और इन्हें होने वाले आर्थिक लाभ के उपयोग के संदर्भ में भी प्रशिक्षित करने का कार्य किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण निरंतर अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत करने के साथ-साथ समाज की जरूरतों को भी पूरा करने की दिशा में कार्य कर सकें, बाजार में उपलब्ध कराने वाले दूध-अंडा और मांस की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी जा रही है.
पलायन की समस्या हुई दूर
लोहरदगा जिला के ग्रामीण अब अपने पुश्तैनी कार्यों की ओर वापस लौट रहे हैं. पहले पलायन करने के लिए ये किसान गांव में पशुओं को बेच दिया करते थे. लेकिन अब इनकी बदली सोच ने समय और परिस्थितियों को बदल दिया है. अब ये पलायन न कर अपने गांव घर में ही पशुओं को पालने और उनसे होने वाले आर्थिक लाभों को अपने जीवन में इस्तेमाल करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं. कहा जाए तो समय के साथ किसानों ने जीवन जीने का तरीका फिर से एक बार इस कम्प्यूटर युग में सीख लिया है, और समय के साथ इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं.
रिपोर्ट: गौतम लेनिन, लोहरदगा
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