झारखंड के सभी डिजिटल डिस्पेंसरी बंद होने से मरीजों की क्यों बढ़ी परेशानी, जानिए

    झारखंड के सभी डिजिटल डिस्पेंसरी बंद होने से मरीजों की क्यों बढ़ी परेशानी, जानिए

    पलामू ( PALAMU): वर्ष 2019 में झारखंड में एक सौ स्थानों पर झारखंड डिजिटल डिस्पेंसरी खोला गया था. जिसे 5 अगस्त 2022 से बंद कर दिया गया है. इससे लाखों मरीजों की परेशानी बढ़ गई है, जिनका इलाज डिजिटल डिस्पेंसरी के माध्यम से हैदराबाद या अन्य जगह के बड़े चिकित्सकों से ऑनलाइन किया जाता था. कर्मचारियों ने बताया कि प्रत्येक डिस्पेंसरी में एक लैब टेक्नीशियन सह कंप्यूटर ऑपरेटर व एक महिला कर्मचारी नियुक्त किए गए थे. उन्हें बताया गया था कि उन्हें पांच वर्ष के लिए अनुबंध पर रखा जा रहा है. पांच वर्ष के बाद पुनः रखा जाएगा. डिस्पेंसरी बंद हो जाने से सैकड़ोंं कर्मचारी बेरोजगार हो गए. जबकि प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन इलाज के लिए आने वाले सैकड़ों लोगों के समक्ष बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है.

    पलामू में  डिजिटल डिस्पेंसरी के पांच केंद्र

    जिले में भी झारखंड डिजिटल डिस्पेंसरी के पांच केंद्र हैं. जिसमें हैदरनगर, कोणवाई, पोलपोल, रामगढ़ व रेहला शामिल है. हैदरनगर केंद्र से इलाजरत मरीज दयानंद पासवान ने बताया कि डिस्पेंसरी के माध्यम से उनका इलाज  हैदराबाद के चिकित्सक ऑनलाइन करते थे. उन्हें दावा व जांच का भी पैसा नहीं देना पड़ता था. उन्होंने कहा कि वह लगातार दस दिनों से हैदरनगर केंद्र पर आते हैं और लौट जाते हैं. लगातार केंद्र बंद मिलता है. उन्होंने बताया कि अब उन्हें किसी बड़े शहर में पुनः इलाज शुरू करना पड़ेगा.  इसके लिए उनके पास पैसा भी नहीं है. उन्होंने सरकार के इस निर्णय को गलत बताया. उन्होंने कहा कि असाध्य रोग से पीड़ित गरीब रोगियों के लिए डिजिटल डिस्पेंसरी काफी राहत देने वाला था.

    रोजी रोटी की समस्या- अब वह जाएं तो जाएं कहां

    डिजिटल डिस्पेंसरी हैदरनगर के इंचार्ज रविंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें डिस्पेंसरी बंद करने के साथ ही वेतन बंद करने का भी पत्र प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा कि उन्हे पांच वर्ष के लिए रखा गया था. जबकि साढ़े तीन साल में ही सेवा समाप्त कर दी गई. इससे उनके समक्ष रोजी रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है. अब वह जाएं तो जाएं कहां. इसी प्रकार कर्मचारी सीता कुमारी ने बताया कि डिजिटल डिस्पेंसरी में उनकी न्युक्ति होने से वह अपने परिवार का भरण पोषण करती थी. मरीजों को भी पूरी सेवा देने का प्रयास करती थी. अचानक उनके सिर पर पहाड़ टूट पड़ा. इस माह उन्हे पत्र मिला, जिसने डिस्पेंसरी बंद करने के साथ साथ उन्हे भी सेवा से हटाने का आदेश है. उन्होंने बताया कि 5 अगस्त से डिस्पेंसरी बंद होने के साथ साथ वह बेकार हो गई. उन्होंने बताया कि अचानक के इस निर्णय से वह काफी परेशान हैं. उनके समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. उन्होंने बताया कि अब इतनी जल्दी कहीं नौकरी मिल नहीं सकती. बेरोजगारी ने उन्हें परेशान कर दिया है. उन्होंने सरकार से झारखंड डिजिटल डिस्पेंसरी को चालू करने की मांग की है.

    रिपोर्ट - जफर हुसैन, पलामू.


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news