धनबाद की  इस आदिवासी बेटी के संघर्ष के जज्बे को क्यों लोग कर रहे सलाम, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

    धनबाद की  इस आदिवासी बेटी के संघर्ष के जज्बे को क्यों लोग कर रहे सलाम, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

    धनबाद (DHANBAD) : धनबाद के इस आदिवासी बेटी की संघर्ष के जज्बे को सब कोई सलाम कर रहा है. आखिर करे भी क्यों नहीं. विपरीत परिस्थितियों में देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी से कानूनी लड़ाई लड़कर अपना हक हासिल की है. यह अलग बात है कि इस लड़ाई में उसे लगातार कठिनाइयों के दौर से गुजरना पड़ा. ईश्वर ने भी उसकी डेग-डेग पर परीक्षा ली. विपरीत परिस्थितिया पैदा हुई लेकिन अपने हौसले की बदौलत कोल इंडिया जैसी बड़ी कंपनी को भी कानूनी लड़ाई में चारों खाने चित कर दिया. कोल इंडिया के पास जहां वकीलों का बड़ा-बड़ा पैनल था, वहां यह बेटी खुद की लड़ाई आर्थिक संकट के बीच लड़ते हुए लड़ी और उसे जीत मिली. दरअसल, धनबाद में कोल इंडिया की अनुषंगी ईकाई ईसीएल के मुगमा एरिया की आरती मुर्मू को सोमवार को नियोजन मिल गया. 

    हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़ी
     
    इसके लिए उसे हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़ी. दरअसल, धनबाद के गोविंदपुर के बरवा की रहने वाली आरती मुर्मू को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ईसीएल ने राजा कोलियरी में ज्वाइन कराया है. उसका मायके पंचेत में है. आरती मुर्मू के ससुर नुनु लाल हेंब्रम मुगमा एरिया की चापापुर कोलियरी में जनरल मजदूर थे. उनका निधन 2019 में हो गया. उनके निधन के बाद उसके पति कृष्णा मुर्मू ने ईसीएल में नियोजन के लिए आवेदन किया. लेकिन ईश्वर ने यहां भी आरती के साथ नाइंसाफी की. पति को अभी नियोजन मिला भी नहीं था कि वर्ष 2020 में हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई. उसके बाद तो आरती के सामने दुखों का पहाड़ टूट गया. उस समय उसे 3 माह की एक बेटी थी. घर में कोई पुरुष सदस्य था नहीं. जिसे नुनु लाल के डेथ केस की नौकरी दी जाए.  

    ससुर के बदले नियोजन के लिए आरती ने किया था आवेदन 

    आरती ने अपने ससुर के बदले नियोजन के लिए ईसीएल मुगमा एरिया में आवेदन किया. लेकिन प्रबंधन ने नियमों का हवाला देते हुए उसके नियोजन पत्र को रिजेक्ट कर दिया. कहा कि प्रोविजन में पुत्रवधू को नियोजन नहीं दिया जा सकता है. लेकिन इसके बाद आरती ने अपना कदम आगे बढ़ाया, वह ठान ली कि वह ना अब रुकेगी और ना झुकेगी. मामले को लेकर वह सीधे कोलकाता उच्च न्यायालय गई. उच्च न्यायालय ने आरती के पक्ष में फैसला देते हुए प्रबंधन को उसे योगदान दिलवाने का आदेश दिया. इसके बाद ईसीएल प्रबंधन में हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए डबल बेंच में अपील की. डबल बेचने भी सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा और नियोजन देने का आदेश दिया.  

    प्रबंधन इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक गया

    इसके बाद प्रबंधन इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय गया तो वहां से नवंबर 2024 में आरती के पक्ष में फैसला आया और प्रबंधन को जल्द से जल्द से योगदान दिलवाने का आदेश हुआ. इसके बाद पहली  फरवरी को विधिवत ईसीएल  प्रबंधन ने उसे नियुक्ति पत्र  दिया. एक आदिवासी घर की महिला कोलकाता से लेकर दिल्ली तक गई और अंततः फैसला उसके पक्ष में आया. दरअसल, हाई कोर्ट के फैसले ने उसका मनोबल बढ़ा दिया था और उसे भरोसा हो गया था कि सुप्रीम कोर्ट से भी उसके पक्ष में फैसला आ सकता है. बताया जाता है कि कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई में पुत्र बधू को नौकरी का  यह पहला मामला है. किसी कर्मी के निधन के बाद उसके पुत्रवधू को नियोजन मिला है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ईसीएल  में ऐसे  नियम ना माना जाए लेकिन आरती मुर्मू को नियोजन दिया जाए.  

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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