इंद्रदेव को खुश करने के लिए सावन में संपन्न हुई अनोखी शादी, दूल्हा-दुल्हन संग सजे बाराती

    इंद्रदेव को खुश करने के लिए सावन में संपन्न हुई अनोखी शादी, दूल्हा-दुल्हन संग सजे बाराती

    दुमका(DUMKA):वैसे तो अभी सावन महीने का पुरुषोत्तम मास चल रहा है. जिसमे सभी शुभ कामों पर रोक लगा दी जाती है. चार महीने तक हिंदु रिति-रिवाज के अनुसार शादी विवाह का कार्यक्रम नहीं किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद आज हम ऐसे अनोखी शादी  की बात कर रहे है. जो चर्चा का बिषय बन चुकी है. जहां घर में मांगलिक माहौल है. परिवारवाले ढोल नगाड़े और मांदर की थाप पर उत्सव मना रहे हैं. वहीं नाचती गाती महिलाओं की टोली यह बताने के लिए काफी है कि घर में खुशी का कैसा माहौल है.

    अनोखी शादी की चर्चा बटोर रही है सुर्खियां

    ये नजारा दुमका जिला के मसलिया प्रखंड के गोलपुर ताला टोला का है. गांव में शादी विवाह का उत्सवी माहौल है, लेकिन यहां दुल्हा और दुल्हन दोनो अनोखे है.इसके वाबजूद लोगों का उत्साह में किसी तरह की कोई कमी नहीं है. महिलाएं खुशी से झूम रही है, ढोल नगाड़ों की आवाज से पूरा माहौल खुशियों से भर गया है. वहीं इस शादी की चर्चा दुमका के आलावा झारकंड के अन्य जिलों में भी हो रही है.

    लोगों ने कराई अनोखे दूल्हा-दुल्हन की शादी

    भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है. जहां अलग-अलग क्षेत्र में कई तरह की परंपराओं के रंग-रूप, रहन सहन, और रीति-रिवाज देखने को मिलते है. दुमका जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है, और आदिवासी समाज में इस मौसम में शादी कराने से ग्रामीणों की माने तो जब बर्षा होती है. वर्तमान में यहां  अकाल की स्थिति उत्पन्न होने लगा है. सूखे पड़े खेत को देख कर किसानों के चेहरे मुरझाने लगते हैं. जिसको देखते हुए इस अनोखी शादी को कराया जा रहा है.

    मान्याता के अनुसार ऐसी शादी कराने से बर्षा होती है

    अब हम आपको इस अनोकी शादी की पूरी सच्चाई विस्तार से बताते है कि ये शादी किसी लड़के या लड़की की नहीं हो रही है. इस शादी में दुल्हा कोई रईसजादे इंसान की नहीं है, तो वहीं दुल्हन भी कोई विश्व सुंदरी नहीं है, बल्कि दुल्हा और दुल्हन दोनों मेढक और मेढकी है. इस शादी को ग्रामीणों ने संपन्न कराई है. ऐसी मान्यता है कि मेढक और मेढकी की शादी कराने से बर्षा होती है.

    लोगों को उम्मीद है कि इस शादी के बाद जमकर होगी बरसात

    इस बर्ष कम बारिश की वजह से अकाल की स्थिति त्पन हो गई है. जिसको देखते हुए ग्रामीणों ने मेढक और मेढकी की शादी कराई है. पूरी तैयारी के साथ वर और वधु पक्ष ने मिलकर रीति रिवाज के अनुरूप मेढक और मेढकी का विवाह संपन्न कराया. ग्रामीणों का कहना है कि ये काफी पुरानी परंपरा है. पिछले बर्ष भी जब अकाल की स्थिति उत्पन्न हो रही थी तो मेढक और मेढकी की शादी कराई गई थी. उसका परिणाम भी सामने आया था और जमकर वर्षा हुई थी.

    पिछले साल भी कराई गई थी शादी

    ग्रामीणों को उम्मीद है कि मेढक और मेढकी का विवाह संपन्न हो गया है, तो निश्चित रूप से बर्षा होगी और किसानों के मुरझाए चेहरे खिल उठेंगे. हमारे समाज मे कई तरह के टोटके देखने को मिलते है. कुछ दिन पूर्व ही बर्षा की कामना को लेकर बासुकीनाथ मंदिर में शिवलिंग पर गौदुहान की परंपरा अदा की गई थी. कुछ दिनों तक बर्षा भी हुई, अब मेढक और मेढकी की शादी सम्पन्न कराई गई है. उम्मीद है कि इस टोटके से भी बर्षा होगी.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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