पारसनाथ के जंगलों में बसे इस गांव में कभी नक्सलियों का होता था बोलबाला, आज  सीआरपीएफ और गिरिडीह पुलिस की पहल से बदल रही गांव की तस्वीर

    पारसनाथ के जंगलों में बसे इस गांव में कभी नक्सलियों का होता था बोलबाला, आज  सीआरपीएफ और गिरिडीह पुलिस की पहल से बदल रही गांव की तस्वीर

    गिरिडीह:- पारसनाथ पहाड़ के दक्षिणी छोर में बसे धोलकट्टा गांव जहां कभी नक्सलियों का कई बंकर और कुख्यात नक्सलियों का बोलबाला रहता था. आज पुलिस अपने सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत ग्रामीणों के बीच पहुंचकर गांव का विकास कर रहे हैं .  कार्यक्रम आयोजित करते हुए धोलकट्टा आदिवासी ग्रामीणों के बीच जरूरत के कई सामानों  जैसे कम्बल, पानी रखने का बड़ा जार, सौलर लालटेन का वितरण किया. वहीं विद्यालय में पढ़ने वाले छात्राओं के बीच कलम, कॉपी ,स्कूली बैग एवं ग्रामीण खिलाड़ियों के बीच हॉकी सेट क्रिकेट सेट एवं फुटबॉल सेट का वितरण किया. इस कार्यक्रम का उद्घाटन 154 बटालियन सीआरपीएफ के उपकमांडेंट अमित कुमार झा द्वारा किया गया. इस दौरान धोलकट्टा गांव सहित आसपास के सुदूर ग्रामीण इलाकों के दर्जनों महिलाओं पुरुष एवं विद्यालय में पढ़ने वाले छात्राएं उपस्थित होकर आहूत इस कार्यक्रम में शरीक हुए. विभिन्न ग्रामीण इलाकों के जनप्रतिनिधियों की भी उपस्थिति देखी गईं.

    2017 में  धोलकट्टा गाँव खूब चर्चित था

    आपको बता दे की धोलकट्टा गांव 2017 से चर्चा में आया जब नक्सलियों और सीआरपीएफ एवं जिला बल के साथ मुठभेड़ हुआ था. जहां नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमला किया गया था तो वहीं पर जवाबी कार्रवाई में एक तथाकथित नक्सली मोतीलाल बास्के को गोली लगी थी और उसकी मौत हो गई. इसके बाद आदिवासी संगठनों ने पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ बताया था तथा कई आदिवासी संगठनों द्वारा इसको लेकर आंदोलन भी किए गए थे. वही मृतक के परिजनों और सहजनों द्वारा इसे फर्जी मुठभेड़ बताया गया था. 

    बता दें कि मोतीलाल बास्के की मौत के  मृतक के परिजनों द्वारा उचित मुआयजे की भी मांग की गई थी तथा इस घटना की चर्चा पूरे झारखंड ही नहीं पूरे देश में हुई थी और बाबूलाल मरांडी ,हेमंत सोरेन स्थानीय विधायक स्वर्गीय जगन्नाथ महतो सहित कई दिग्गज नेता  गांव पहुंचे थे. जिसके बाद उनके परिजनों द्वारा तत्कालीन सरकार से मुआवजे की भी मांग की गई थी.  तो वहीं स्थानीय मजदूर संगठन एवं मजदूर यूनियन के केंद्रीय पदाधिकारी समिति यूनियन के विभिन्न शाखाओं के लोगों द्वारा इसकी निंदा की गई थी तथा जांच की मांग की गई थी.

    अब बदल गए हैं हालात

    इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा इस पारसनाथ पहाड़ के तलहटी में बसे इस क्षेत्र के विकास के लिए कई योजनाओं का शुभारंभ किया गया. जिसके कारण आज यह क्षेत्र विकास के साथ आगे बढ़ रहा है एवं जंगलों के बीच विद्यालय एवं रास्ते एवं पुल पुलिया का निर्माण भी हो चुका है. 
    वही इस क्षेत्र में शांति बहाल रहे इसके लिए सीआरपीएफ 154 बटालियन का कैंप भी खोला गया है ताकि इस क्षेत्र के लोग नक्सलवाद से दूर रहे. वही सीआरपीएफ कैंप के खुलने के बाद क्षेत्र से नक्सलवाद धीरे-धीरे खत्म होते जा रहा है. इस प्रकार पारसनाथ के दक्षिणी छोर में बसे इस गांव का तकदीर और तस्वीर भी बदल गई है.

    रिपोर्ट :- दिनेश कुमार रजक, गिरिडीह


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